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Vyapam Scam Fake Domicile: मध्य प्रदेश में फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र के आधार पर डॉक्टर बनने वाले एक आरोपी को भोपाल की कोर्ट ने शुक्रवार, 30 जनवरी को सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की कोर्ट ने आरोपित डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी करार देते हुए तीन की सजा और दो हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला व्यापमं घोटाले से जुड़ी कड़ियों का हिस्सा है। आरोपित सीताराम शर्मा वर्तमान में जिला भिंड के सरकारी अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र पर MBBS में लिया एडमिशन
प्रकरण के मुताबिक, आरोपित ने वर्ष 2009 में पीएमटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रदेश के राज्य कोटे का अवैध लाभ लेने के लिए मुरैना जिले की अंबाह तहसील का कूटरचित (फर्जी) मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
जांच में मूल निवासी प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया
जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि आरोपित ने अपनी हाईस्कूल (1984) और इंटरमीडिएट (2001) की शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से पूरी की थी। जांच में अंबाह तहसील के रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि वहां से सीताराम शर्मा के नाम पर कोई भी मूल निवासी प्रमाण पत्र कभी जारी नहीं किया गया था।
दिग्विजय सिंह की शिकायत पर कार्रवाई
व्यापमं फर्जीवाड़े का पर्दाफाश पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की शिकायत के बाद हुआ था। शिकायत में उन्हों ने जिक्र किया था कि उत्तर प्रदेश के कैंडिडेट्स फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मध्य प्रदेश की मेडिकल सीटों पर एडमिशन ले रहे हैं।
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