MP के स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित: पांच दिन स्कूली बच्चों की बल्ले-बल्ले, जानें डिटेल

मध्यप्रदेश के स्कूली छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा।

MP Schools Winter Vacation

MP Schools Winter Vacation: मध्यप्रदेश के स्कूली छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से शीतकालीन अवकाश को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। राज्य शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए घोषणा की है कि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा।

यह निर्णय सभी शिक्षा बोर्डों से संबद्ध स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा, जिससे अवकाश को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।

शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन

शिक्षा विभाग ने इस बार शीतकालीन अवकाश को लेकर सख्त रुख अपनाया है। शासन के आदेश के अनुसार सभी स्कूलों को घोषित तिथियों का ही पालन करना होगा। इसी वजह से मिशनरी स्कूलों सहित कई निजी स्कूलों ने अपने पुराने अवकाश पैटर्न में बदलाव किया है। (भोपाल | इंदौर | जबलपुर | ग्वालियर)

मिशनरी स्कूलों ने बदला पुराना नियम

प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध मिशनरी स्कूलों की संख्या अधिक है। बीते वर्षों में इन स्कूलों में शीतकालीन अवकाश आमतौर पर 23 दिसंबर से 2 जनवरी तक घोषित किया जाता था, जो शासन की तय तारीखों से अलग था। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के चलते मिशनरी स्कूलों ने भी शासन के अनुसार ही छुट्टियां घोषित की हैं।

लगातार 5 दिन का अवकाश

राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में एमपी बोर्ड, सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। वहीं 4 जनवरी रविवार होने के कारण सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस तरह छात्रों को लगातार 5 दिनों की छुट्टियां मिलेंगी।

5 जनवरी से खुलेंगे स्कूल

शीतकालीन अवकाश के बाद प्रदेश के सभी स्कूल 5 जनवरी (सोमवार) से नियमित रूप से खुलेंगे और पढ़ाई पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार शुरू होगी।

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छात्रों और पैरेंट्स को बड़ी राहत

एक समान अवकाश व्यवस्था लागू होने से छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। अब अलग-अलग बोर्ड और स्कूलों की छुट्टियों को लेकर कोई भ्रम नहीं रहेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे शैक्षणिक अनुशासन बना रहेगा और पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी।

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