MP Police: एमपी के पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में गूंजेगा दक्षिणामूर्ति स्तोत्र: रामचरितमानस और गीता के बाद नई पहल, 'हमदर्द' बनेंगे पुलिसकर्मी

मध्यप्रदेश के सभी पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में अब सुबह की शुरुआत भगवान शिव को समर्पित ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी। PHQ का मानना है कि इससे प्रशिक्षुओं में मानसिक शांति, संवेदनशीलता और हमदर्दी की भावना विकसित होगी।

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MP Police Training Dakshinamurti Stotra: मध्यप्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की पद्धति में एक बड़ा बदलाव किया गया है। गीता और रामचरितमानस के पाठ के बाद अब प्रदेश के सभी पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों (PTS) में 'श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' गूंजेगा। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (PA System) के माध्यम से इस स्तोत्र को बजाने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि इससे पुलिसकर्मियों में नैतिक स्पष्टता आएगी, जबकि विपक्ष ने इसे प्रशासनिक तटस्थता के खिलाफ बताया है।

ट्रेनिंग स्कूलों में अब गूंजेगा दक्षिणामूर्ति स्तोत्र

मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन अब अपने नए आरक्षकों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक रूप से भी मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रदेश के सभी पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अब दिन की शुरुआत भगवान शिव के सम्मान में गाए जाने वाले 'दक्षिणामूर्ति स्तोत्र' से की जाएगी।

मानसिक शांति और ज्ञान का स्रोत

एडीजी (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह के अनुसार, दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का वह स्वरूप है जो सर्वोच्च ज्ञान, ध्यान और विवेक का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग ले रहे लगभग 4000 आरक्षकों के लिए केवल कानूनी जानकारी ही पर्याप्त नहीं है; उनमें समाज के प्रति दया, सहानुभूति और संवेदनशीलता होना अनिवार्य है। इस स्तोत्र के गायन से प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों, दोनों को मानसिक शांति मिलेगी।

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गीता और रामचरितमानस के बाद अगला कदम

यह पहली बार नहीं है जब MP पुलिस में ऐसे निर्देश दिए गए हों। इससे पहले भी ट्रेनिंग सत्रों के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय और रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ अनिवार्य किया जा चुका है। अब सभी पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में सुबह दक्षिणामूर्ति स्तोत्र बजाया जाएगा, जो भगवान शिव के सम्मान में एक भजन है। विभाग का मानना है कि इन दार्शनिक ग्रंथों के अध्ययन से पुलिसकर्मियों के चरित्र निर्माण में सहायता मिलती है और वे तनावपूर्ण स्थितियों में भी शांत रहकर निर्णय ले सकते हैं।

नैतिक स्पष्टता पर जोर

एडीजी प्रशिक्षण का मानना है कि इस पहल से पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगे और उनमें नैतिक स्पष्टता आएगी। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे विवेक, संवेदनशीलता और सहानुभूति भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि स्तोत्र के माध्यम से प्रशिक्षुओं में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

छिड़ा सियासी घमासान

इस आदेश के जारी होते ही मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सवाल उठाया कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली संस्थाओं को संवैधानिक रूप से तटस्थ रहना चाहिए। उन्होंने इसे किसी विशेष आस्था को थोपने का प्रयास बताया।

भाजपा का करारा जवाब

भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गीता और दक्षिणामूर्ति स्तोत्र किसी संप्रदाय के नहीं, बल्कि मानवता और कर्तव्य के ग्रंथ हैं। इसे सांप्रदायिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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