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एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण मामला: आज सुप्रीम कोर्ट में फाइनल बहस, छह दिन पहले नहीं पहुंचे थे सरकार के वकील

इससे पहले 29 जनवरी 2026 को कोर्ट की सूची में सीरियल नंबर 106 पर ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण फाइनल बहस दर्ज थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता उपस्थित नहीं होने पर बहस टल गई थी।

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sanjay warude
MP OBC reservation case

MP OBC reservation case: मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर आज यानी बुधवार, 4 फरवरी 2026 को फाइनल बहस होगी।

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जस्टिस पामिदिघंटम नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ की अदालत में फाइनल बहस होगी। इससे पहले 29 जनवरी 2026 को कोर्ट की सूची में सीरियल नंबर 106 पर ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण फाइनल बहस दर्ज थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता उपस्थित नहीं होने पर बहस टल गई थी। इस पर जस्टिस पार्श्व सुब्रमण्यम नरसिम्हा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने गहरी नाराजगी जताई थी।

इन मामलों की संयुक्त सुनवाई

104 सी.ए. संख्या 11442-11443/2025 - योगेश कुमार ठाकुर (मुख्य मामला)
104. 1 एसएलपी(सी) संख्या 8764/2023 हरिशंकर बरोदिया
104. 2 डायरी संख्या 23299-2023 जया ठाकुर
104. 3 एसएलपी(सी) संख्या 12398/2023 दीपक कुमार पटेल
104. 4 टी.सी. (सी) संख्या 10/2025 शांतिलाल जोशी और अन्य
104.5 टी.सी. (सी) संख्या 6/2025 पीयूष जैन
104. 6 टी.सी. (सी) संख्या 15/2025 आशिता दुबे और अन्य
104. 7 टी.सी. (सी) संख्या 14/2025 सौरभ सोंगर और अन्य।
104. 8 टी.सी. (सी) संख्या 7/2025 शिवम गौतम
104. 9 टी.सी. (सी) संख्या 12/2025 लोकेन्द्र गुर्जर
104. 10 टी.सी.(सी) संख्या 11/2025 अनामिका तोमर
104. 11 टी.सी.(सी) संख्या 13/2025 अली सेहरवाला और अन्य।
104. 12 टी.सी.(सी) संख्या 16/2025 आशिता दुबे और अन्य। 104. 13 W.P.(C) No. 496/2025 PIL-W O.B.C. एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन
104. 14 W.P.(C) No. 606/2025 निश्चय सोनबीरसे और अन्य
104. 15 W.P.(C) No. 735/2025 कृष्णा नारायण वर्मा और अन्य
104. 16 W.P.(C) No. 866/2025 रितु बडोले
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सरकार के फैसले पर कब लगी रोक ?

मार्च 2020 में हाई कोर्ट (high court) ने फैसले पर रोक लगाकर कहा कि कुल आरक्षण (Reservation) 50% की सीमा से अधिक नहीं हो सकता।

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आगे कैसे मिली आरक्षण को मंजूरी ?

सितंबर 2021 को एमपी सरकार (MP government) ने नई गाइडलाइंस (guidelines) जारी कर सामान्य प्रशासन विभाग (Department of General Administration) ने 27% आरक्षण देने की अनुमति दी गई।

किस कोर्ट ने होल्ड पर रखे पद ?

अगस्त 2023 में हाई कोर्ट (high court) ने विवाद को सुलझाने के लिए 87:13 फॉर्मूला लागू किया और 87% पदों पर भर्ती की गई, इसमें 13% पदों को होल्ड पर रखा।

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अनुच्छेद 226 क्या है ?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को रिट जारी करने और मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कानूनी संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति देता है। सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि क्या राज्य सरकार का ये संशोधन कानूनी रूप से स्थिर रह पाएगा या नहीं। इसी पर फैसला होगा।

आगे और पढ़े कब-कब सुनवाई ?

  • 8 मार्च 2019 को तत्कालीन कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया।
  • 19 मार्च 2019 को जबलपुर हाईकोर्ट ने अशिता दुबे बनाम मप्र सरकार ने मामले में बढ़े हुए 27% आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी।
  • 14 अगस्त 2019 को मप्र विधानसभा ने संशोधन विधेयक को पारित किया, जिससे यह कानूनी रूप से लागू हुआ, लेकिन कोर्ट की रोक रही।
  • 2021 में सरकार ने परीक्षाओं के परिणाम के लिए 87% मुख्य सूची और 13% प्रावधिक प्रोविजनल सूची का फॉर्मूला पेश किया।
  • 2024 में हाईकोर्ट में लंबित लगभग 70 याचिकाओ को एकसाथ जोड़कर सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया गया।
  • 7 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यूथ फॉर इक्वलिटी की याचिका पर कहा कि इस कानून में कोई अड़चन नहीं है।
  • 22 अप्रैल 2025 में इस मामले से जुड़ी 52 याचिकाएं हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दी गईं। 
  • 25 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विशेष सुनवाई की।
  • 22 जुलाई को हाईकोर्ट ने ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण क्रियान्वयन आदेश पर स्टे दिया।
  • 12 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट में केस को टॉप ऑफ द बोर्ड में लिस्टेड किया गया।
  • 28 अगस्त 2025 को सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने आरक्षक पर सहमति जताई।
  • 22 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अंतिम सुनवाई की तारीखें तय की।
  • 23 सितंबर से सुप्रीम कोर्ट ने डे टू डे सुनवाई के आदेश दिए।
  • 18 सितंबर को राज्य सरकार और कोर्ट के बीच तालमेल के लिए उपसचिव अजय कटसेरिया को जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • 8 अक्टूबर 2025 को नियमित शुरू होना थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई।
  • 3 नवंबर 2025 को प्रदेश सरकार से ओबीसी, एससी, एसटी व महिलाओं के प्रतिनिधित्व का डेटा मांगा।

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