Advertisment

एमपी में 27% OBC आरक्षण मामला: बार-बार स्थगन पर अदालत सख्त, सुप्रीम कोर्ट की वकीलों को चेतावनी- अब और मोहलत नहीं...

MP OBC Reservation Case Update: मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान बार-बार स्थगन मांगने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। 

author-image
sanjay warude
MP OBC Reservation Case

MP OBC Reservation Case Update: मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान बार-बार स्थगन मांगने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। 

Advertisment

प्रदेश में ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण और विभिन्न सरकारी अधिसूचनाओं (Notifications) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पार्श्व सुब्रमण्यम नरसिम्हा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने गहरी नाराजगी जताई। ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण फाइनल बहस के लिए गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को कोर्ट की सूची में सीरियल नंबर 106 पर दर्ज थे। हालांकि, जब मामला पुकारा गया, तो मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पैरवी के लिए एक भी अधिवक्ता उपस्थित नहीं पहुंचा था।

हर बार नई तारीख लेना पैटर्न बन गया- कोर्ट

जस्टिस पार्श्व सुब्रमण्यम नरसिम्हा और जस्टिस विजय बिश्नोई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर बार नई तारीख लेना एक पैटर्न बन गया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि हम देख रहे हैं कि हर बार किसी न किसी बहाने समय लिया जा रहा है और मामला स्थगित हो रहा है। ऐसा नहीं चल सकता।

इस मामले मेंचुनौती सीधे एक्ट को नहीं- कोर्ट

कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में चुनौती सीधे अधिनियम (Act) को नहीं, बल्कि उससे जुड़ी अधिसूचनाओं और कंपाइलेशन को दी जा रही है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भ्रम से बचने के लिए एक-एक करके मामले देखे जा रहे हैं। कुछ मामले सीधे तौर पर EWS कोटे से जुड़े हैं तो कुछ तकनीकी अधिसूचनाओं से जुड़े हैं।

Advertisment

सहयोगियों से कहें अब स्थगन की मांग न करें

जब एक पक्ष ने फिर से थोड़ी मोहलत चाही, तो अदालत ने तीखा सवाल किया- कोर्ट आखिर क्या करेगा? यदि आप समय नहीं मांग रहे, तो आपके अन्य साथी मांग रहे हैं। आप अपने सहयोगियों से कहें कि वे अब स्थगन की मांग न करें।

सरकार के फैसले पर कब लगी रोक ?

मार्च 2020 में हाई कोर्ट (high court) ने फैसले पर रोक लगाकर कहा कि कुल आरक्षण (Reservation) 50% की सीमा से अधिक नहीं हो सकता।

आगे कैसे मिली आरक्षण को मंजूरी ?

सितंबर 2021 को एमपी सरकार (MP government) ने नई गाइडलाइंस (guidelines) जारी कर सामान्य प्रशासन विभाग (Department of General Administration) ने 27% आरक्षण देने की अनुमति दी गई।

Advertisment

किस कोर्ट ने होल्ड पर रखे पद ?

अगस्त 2023 में हाई कोर्ट (high court) ने विवाद को सुलझाने के लिए 87:13 फॉर्मूला लागू किया और 87% पदों पर भर्ती की गई, इसमें 13% पदों को होल्ड पर रखा।

अनुच्छेद 226 क्या है ?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को रिट जारी करने और मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कानूनी संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति देता है। सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि क्या राज्य सरकार का ये संशोधन कानूनी रूप से स्थिर रह पाएगा या नहीं। इसी पर फैसला होगा।

ये भी पढ़ें: MP OBC Reservation: 27% आरक्षण पर सभी दल एकमत, 13% होल्ड कैंडिडेट्स को एज लिमिट पूरी करने से पहले नौकरी दिलाने के प्रयास

Advertisment

आगे और पढ़े कब-कब सुनवाई ?

  • 8 मार्च 2019 को तत्कालीन कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया।
  • 19 मार्च 2019 को जबलपुर हाईकोर्ट ने अशिता दुबे बनाम मप्र सरकार ने मामले में बढ़े हुए 27% आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी।
  • 14 अगस्त 2019 को मप्र विधानसभा ने संशोधन विधेयक को पारित किया, जिससे यह कानूनी रूप से लागू हुआ, लेकिन कोर्ट की रोक रही।
  • 2021 में सरकार ने परीक्षाओं के परिणाम के लिए 87% मुख्य सूची और 13% प्रावधिक प्रोविजनल सूची का फॉर्मूला पेश किया।
  • 2024 में हाईकोर्ट में लंबित लगभग 70 याचिकाओ को एकसाथ जोड़कर सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया गया।
  • 7 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यूथ फॉर इक्वलिटी की याचिका पर कहा कि इस कानून में कोई अड़चन नहीं है।
  • 22 अप्रैल 2025 में इस मामले से जुड़ी 52 याचिकाएं हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दी गईं। 
  • 25 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर विशेष सुनवाई की।
  • 22 जुलाई को हाईकोर्ट ने ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण क्रियान्वयन आदेश पर स्टे दिया।
  • 12 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट में केस को टॉप ऑफ द बोर्ड में लिस्टेड किया गया।
  • 28 अगस्त 2025 को सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने आरक्षक पर सहमति जताई।
  • 22 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अंतिम सुनवाई की तारीखें तय की।
  • 23 सितंबर से सुप्रीम कोर्ट ने डे टू डे सुनवाई के आदेश दिए।
  • 18 सितंबर को राज्य सरकार और कोर्ट के बीच तालमेल के लिए उपसचिव अजय कटसेरिया को जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • 8 अक्टूबर 2025 को नियमित शुरू होना थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई।
  • 3 नवंबर 2025 को प्रदेश सरकार से ओबीसी, एससी, एसटी व महिलाओं के प्रतिनिधित्व का डेटा मांगा।

ये भी पढ़ें:एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट में फाइनल बहस में नहीं पहुंचे वकील, अगली सुनवाई 4 फरवरी को

MP news hindi news Justice Vijay Bishnoi Justice Parshva Subramanian Narasimha MP OBC reservation case Video viral MP OBC Reservation Case
Advertisment
चैनल से जुड़ें