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MP 27 Percent OBC Reservation Final Hearing: मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में 21 जनवरी, बुधवार को आखिरी सुनवाई होगी। OBC आरक्षण के सभी मामलों की आखिरी सुनवाई लिस्टेड की गई है। मध्यप्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में याचिका ट्रांसफर कराई है। जस्टिस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच में सुनवाई होगी। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से कई बार बहस के लिए समय लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था ?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि राज्य के कानून की संवैधानिकता का अनुच्छेद 226 के तहत परिक्षण करने का सर्वप्रथम हाईकोर्ट को अधिकार है।
27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मामला क्यों अटका ?
मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के वक्त ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का फैसला लिया गया था। इसे बाद में बीजेपी वर्तमान सरकार ने भी जारी रखा। जब केस को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो मामला पेचीदगियों में फंस गया।
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कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा
याचिकाकर्ता मानते हैं कि कुल आरक्षण 50% की सीमा (उदाहरण-इंदिरा साहनी केस) से बाहर नहीं जाना चाहिए। वहीं मध्यप्रदेश सरकार का तर्क है कि प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की आबादी को देखते हुए 27 फीसदी आरक्षण संवैधानिक रूप से जायज है।
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87-13 प्रतिशत फॉर्मूले से कन्फ्यूजन
मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कई बार विस्तृत बहस के लिए समय मांगा। वर्तमान में MP में कई भर्तियों और परीक्षाओं के रिजल्ट 87-13 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर घोषित किए जा रहे हैं। इससे कैंडिडेट्स के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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अनुच्छेद 226 क्या है ?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट को रिट जारी करने और मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कानूनी संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति देता है। सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि क्या राज्य सरकार का ये संशोधन कानूनी रूप से स्थिर रह पाएगा या नहीं। इसी पर फैसला होगा।
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