गिद्ध संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल: सीएम मोहन यादव ने हलाली डैम में प्राकृतिक आवास में छोड़े 5 दुर्लभ गिद्ध, हाई-टेक सिस्टम से होगी सुरक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र में 5 दुर्लभ गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें 4 भारतीय और 1 सिनेरियस गिद्ध शामिल हैं। सरकार आधुनिक तकनीक से इनकी निगरानी करेगी।

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MP Halali Dam Vulture Conservation: मध्यप्रदेश अब केवल बाघों और तेंदुओं का ही नहीं, बल्कि दुर्लभ पक्षियों का भी सुरक्षित घर बनता जा रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में पांच दुर्लभ गिद्धों (Vulture) को खुले आसमान में आजाद किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) एवं एक सिनेरियस गिद्ध (Aegypius monachus) शामिल हैं। यह कदम पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संतुलन को बनाए रखने और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। छोड़े गए गिद्धों की निगरानी के लिए आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। रायसेन जिले के प्रसिद्ध हलाली डैम क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को पिंजरों से मुक्त कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा।

इन छोड़े गए गिद्धों में चार भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) और एक दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध (Aegypius monachus) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पक्षी हमारे पर्यावरण के 'प्राकृतिक सफाईकर्मी' हैं और इनका अस्तित्व पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इन गिद्धों को केवल मुक्त ही नहीं किया गया है, बल्कि इनकी सुरक्षा और गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए आधुनिक तकनीक (GPS टैगिंग) का उपयोग किया जाएगा। इससे विशेषज्ञों को उनके प्रवास, खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी डेटा जुटाने में मदद मिलेगी।

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वन्यजीव संरक्षण में एमपी का दबदबा

सीएम मोहन यादव ने गर्व के साथ कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही बाघ, तेंदुआ और चीता संरक्षण में देश का नेतृत्व कर रहा है। अब राज्य गिद्ध संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, "विभिन्न नवाचारों और प्रयासों से प्रदेश के जंगल, वन्यजीव और पक्षी आबाद हो रहे हैं। हमारी सरकार हर उस जीव के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है जो प्रकृति के चक्र को चलाने में सहायक है।"

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विशेष सैटेलाइट टेलीमेट्री कार्यक्रम

भोपाल स्थित प्रजनन केंद्र में प्रशिक्षण और निगरानी पूरी करने के बाद, इन गिद्धों को हाई-टेक GPS-GSM सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर मुक्त किया गया है। वाइल्डलाइफ एसओएस के विशेषज्ञों की देखरेख में हुई इस टैगिंग से अब उनकी हर गतिविधि और आवाजाही पर वैज्ञानिकों की सीधी नजर रहेगी।

वन विभाग ने WWF-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के साथ मिलकर एक विशेष सैटेलाइट टेलीमेट्री कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके जरिए गिद्धों के पसंदीदा भोजन क्षेत्रों और उनके जीवन पर मंडराने वाले खतरों, जैसे बिजली के झटके या जहर, की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जाएगी।

गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं, जो बीमारियों को फैलने से रोकते हैं। हाल ही में हुए सर्वे के अनुसार, दक्षिण पन्ना में 1000 से अधिक गिद्धों का मिलना प्रदेश में उनकी बढ़ती संख्या का सुखद संकेत है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में वन विभाग के इन संरक्षण प्रयासों की सराहना की। 

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