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Madhya Pradesh MLA Rent Proposal: मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा विधायकों का किराया दिलवाने के प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने पेंच फंसा दिया है। साथ ही कह दिया कि सरकार इतना किराया कैसे दे सकती है? इसमें 25 प्रतिशत तक की कटौती की जाए। साथ ही शासन विधानसभा से उन विधायकों की लिस्ट मांगी है जो पुराने गेस्ट हाउस में रहते थे और उसके टूटने के बाद किराया पर रह रहे हैं।
यहां बता दें, विधानसभा ने करीब 50 विधायकों का हवाला देते हुए हर विधायक को 40 हजार रुपए किराया देने की फाइल वित्त विभाग को भेजी है। जिस पर वित्त विभाग ने 10 हजार रुपए की कम करने की बात कही है।
वित्त विभाग ने कहा- किराए में 10 हजार रु. कम करें
विधायकों 40 हजार रुपए किराया देने के मामले में संसदीय कार्य विभाग के जरिए आए विधानसभा के प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने कह दिया है कि वे इतना किराया नहीं दे सकते। इसमें कम से कम 10 हजार रुपए की कटौती की जाए। दूसरी ओर शासन ने भी विधानसभा से उन विधायकों की सूची मांगी है, जो पुराने एमएलए रेस्ट हाउस में रहते थे और उसके आवास टूटने के कारण अब वे किराए पर रहने वाले हैं।
40 हजार रुपए किराया ज्यादा
विधानसभा के प्रस्ताव पर यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि जिस एमएलए रेस्ट हाउस (खंड-1 और ओल्ड फैमिली ब्लॉक) में विधायक रहते थे, उतनी बड़ी जगह राजधानी में 20 से 25 हजार रुपए मिल सकती है। प्रस्ताव (विधानसभा) में 40 हजार रुपए किराया ज्यादा है।
यहां बता दें, एमएलए रेस्ट हाउस की 67 साल पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर चरणबद्ध तरीके से नए आवास (फ्लैट) बनाए जा रहे हैं। इनकी संख्या कुल 300 है। पहले चरण में 102 फ्लैट बनेंगे।
इस समिति ने तय की राशि
जानकारी के अनुसार, 5 महीने पहले जब एमएलए रेस्ट हाउस की बिल्डिंग को तोड़ा जा रहा था, तब विधानसभा की ओर से प्रस्ताव में शासन को कहा गया कि इसमें जो विधायक रह रहे थे, उन्हें नए भवन बनने तक प्रतिमाह 40 हजार रुपए किराया दिया जाएगा।
यह भी बताया गया कि विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने किराए की राशि तय करके यह फाइल संसदीय कार्य विभाग को भेजी है, लेकिन वित्त विभाग ने इस पर पूरी तरह सहमति नहीं दी। अब संसदीय कार्य विभाग ने विधानसभा को कहा है कि वे पहले तो उन विधायकों की लिस्ट दें, जो टूट चुकी पुरानी एमएलए बिल्डिंग में रह रहे थे। साथ ही यह भी बताएं कि कितने विधायकों को दूसरे सरकारी आवास आवंटित कर दिए गए हैं और कितने एमएलए अब किराए पर रहेंगे। इस तरह का पत्र संसदीय कार्य विभाग ने विधानसभा को भेज दिया है। अब विभाग विधानसभा के जवाब का इंतजार कर रहा है।
सरकार पर आएगा 2.40 करोड़ सलाना का भार
विधानसभा के मौजूदा प्रस्ताव और 50 विधायकों के हिसाब से 40 हजार रुपए प्रति विधायक किराया तय होता है तो सरकार को हर साल 2.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार वहन करना पड़ेगा। यदि इस प्रोजेक्ट के कंम्पलीट होने में 3-4 साल लग गए तो राशि करीब 9 से 10 करोड़ हो जाएगी।
दूसरी ओर यदि वित्त विभाग के हिसाब (30 हजार रु. महीना) से राशि तय होती है तो सरकार के सालाना 60 लाख रुपए तक बचेंगे। साथ ही यदि पहली बार में ही 40 हजार रुपए किराया तय होता है तो आगे टूटने वाले रेस्ट हाउस में रह रहे विधायकों को भी इतनी ही राशि देनी पड़ेगी। इन सब को देखते हुए फिलहाल मामला अटका हुआ है।
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