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Jitu Patwari US India Trade Deal: मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा कि नरेंद्र मोदी एक कंप्रोमाइज प्रधानमंत्री हैं। जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह सरेंडर कर चुके हैं। PCC चीफ जीतू पटवारी ने ट्रेड डील पर कई गंभीर सवाल उठाए।
'ट्रेड डील एक समझौता'
PCC चीफ जीतू पटवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये ट्रे़ड डील अडानी के ऊपर अमेरिका में चल रहे प्रकरणों को दबाने का समझौता है। रूस से तेल न खरीदने के दबाव का समझौता है। प्रधानमंत्री का नाम जो एप्सटीन फाइल्स में आया उस बात का समझौता है।
PCC चीफ ने मांगे तथ्य और लिखित गारंटी
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई बैठक और दिए गए वक्तव्य में किसानों को आश्वस्त करने का प्रयास किया गया, परंतु वास्तविकता यह है कि अब तक उत्पाद-वार टैरिफ संरचना, नॉन-टैरिफ बैरियर की शर्तें और प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। किसानों को भाषण नहीं, बल्कि तथ्य और लिखित गारंटी चाहिए।
'भारत और अमेरिका की कृषि संरचना में भारी असमानता'
PCC चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि भारत और अमेरिका की कृषि संरचना में भारी असमानता है। सार्वजनिक कृषि आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में औसत जोत लगभग 440-450 एकड़ है, जबकि भारत में औसत जोत मात्र 2 से 2.5 एकड़ है। अमेरिका में लगभग 1-2 प्रतिशत आबादी खेती करती है, जबकि भारत में बड़ी आबादी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसी असमान संरचना में खुली प्रतिस्पर्धा भारतीय किसानों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
अमेरिका के किसान से कैसे मुकाबला करेगा भारतीय किसान
अभी तो अमेरिका भारत की ट्रेड डील सामने आई भी नहीं है, फिर भी मंडियों में फसलों के दाम कम हो रहे हैं।
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) February 8, 2026
जब पूरी डील लागू हो जाएगी, तब भारत की सरकार किसानों को खून के आंसू रुलाएगी।@ChouhanShivraj जी, किसानों के साथ फ्रॉड करना बंद करो। pic.twitter.com/6DagzQ8qUP
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि अमेरिका में 'Farm Bill' और अन्य कार्यक्रमों के अंतर्गत व्यापक कृषि सब्सिडी दी जाती है। भारत में औसत प्रत्यक्ष सहायता लगभग 14 हजार प्रति वर्ष प्रति किसान के आसपास बैठती है, जबकि अमेरिकी किसानों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कहीं अधिक वित्तीय समर्थन प्राप्त होता है। दिसंबर 2025 में अमेरिकी प्रशासन द्वारा फसल क्षति के लिए अरबों डॉलर की सहायता स्वीकृत की गई, जो दर्शाता है कि वहां कृषि क्षेत्र को संकट में भी मजबूत वित्तीय सुरक्षा प्राप्त है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यदि नॉन-टैरिफ बैरियर कम किए जाते हैं या बाजार को चरणबद्ध तरीके से खोला जाता है, तो सब्सिडी-समर्थित सस्ता अमेरिकी माल भारतीय बाजार में प्रवेश करेगा। ऐसी स्थिति में 2 एकड़ वाला भारतीय किसान 450 एकड़ वाले सब्सिडी-संरक्षित अमेरिकी किसान से कैसे प्रतिस्पर्धा करेगा ?
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मक्का किसानों की आय पर पड़ेगा असर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार कह रही है कि मक्का का आयात नहीं होगा, लेकिन यदि पोल्ट्री फीड या एनिमल फीड के नाम पर मक्का आधारित प्रोसेस्ड उत्पाद आयात होते हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय मक्का किसानों की आय पर पड़ेगा। इसी प्रकार यदि सोयाबीन का आयात नहीं होगा, लेकिन सोयाबीन तेल आयात होगा, तो मध्य प्रदेश के लाखों सोयाबीन उत्पादक किसानों पर दबाव बनेगा। यह नीतिगत विरोधाभास है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय कृषि संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता थी। उस दौर में कृषि उत्पादों पर औसत आयात शुल्क 30 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक तथा डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में 60 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक रखा गया था, ताकि विदेशी डंपिंग से भारतीय किसानों की रक्षा की जा सके।
यदि 50 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक टैरिफ कमी को उपलब्धि बताया जा रहा है, तो सरकार स्पष्ट करे कि उत्पादन लागत, जोत आकार और सब्सिडी संरचना में भारी अंतर के बावजूद भारतीय किसान वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेगा।
कृषि मंत्री @ChouhanShivraj कह रहे हैं कि अमेरिका से मक्का नहीं आएगा, गेहूं नहीं आएगा।
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) February 8, 2026
पर यह नहीं बता रहे हैं कि मक्का से बने उत्पाद भारत में आएंगे और गेहूं से बने उत्पाद भी आयात किए जाएंगे।
खुद को किसान पुत्र बताने वाले कृषि मंत्री जी किसानों की आर्थिक हत्या कर रहे हैं। pic.twitter.com/rvngw4KtNG
लिखित गारंटी दे सरकार
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री से प्रश्न किया कि क्या वे लिखित रूप से यह गारंटी देंगे कि सोयाबीन तेल आयात से किसानों की कीमत प्रभावित नहीं होगी। पोल्ट्री फीड आयात से मक्का किसानों को नुकसान नहीं होगा। MSP व्यवस्था सुरक्षित रहेगी। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मांग की कि उत्पाद-वार टैरिफ कटौती की विस्तृत सूची, नॉन-टैरिफ प्रावधानों का विवरण तथा इस समझौते की आधिकारिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
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कांग्रेस सड़क पर करेगी विरोध
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि व्यापार विस्तार का विरोध नहीं है, परंतु अन्नदाता की कीमत पर कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग करती है। जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि जिस दिन ट्रेड डील फाइनल होगी उस दिन मध्यप्रदेश का किसान उसके विरोध में सड़क पर होगा और ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस पूरा मध्य प्रदेश किसानों के हित की रक्षा के लिए एक साथ जाम करेगी।
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