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भोपाल विज्ञान महोत्सव 2026: पराली के रीयूज से पेड़ों की कटाई रोकने की अनोखी पहल, इनोवेटिव प्रोजेक्ट ने खींचा सबका ध्यान

भोपाल विज्ञान महोत्सव 2026: भोपाल में श्यामला हिल्स स्थित साइंस सेंटर में विज्ञान महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया था, जिसका उद्देश्य पराली का रीयूज करने और पेड़ों की कटाई को रोकना था.

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Sourabh Pal
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भोपाल विज्ञान महोत्सव 2026: भोपाल में श्यामला हिल्स स्थित साइंस सेंटर में विज्ञान महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया था, जिसका उद्देश्य पराली का रीयूज करने और पेड़ों की कटाई को रोकना था. बता दें कि विज्ञान पर्व और आंचलिक विज्ञान केंद्र की 31वीं वर्षगांठ पर विज्ञान महोत्सव का आयोजन किया गया था. 

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साइंस सेंटर में आयोजित विज्ञान महोत्सव में 17 प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने मॉडल पेश किए थे, जिसमें मुख्य रूप से पेड़ों की कटाई रोकने, प्रदूषण कम करने के लिए पराली से इको फ्रेंडली चीजें बनाने वाला एक प्रोजेक्ट आकर्षण का केंद्र रहा. इसके अलावा लिक्विड नाइट्रोजन को गैस में बदलने वाले मॉडल को भी खूब सराहा गया था.

राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT) इंदौर के वैज्ञानिक राजेंद्र धाकड़ ने छात्रों को चार्ल्स लॉ और बॉयल्स लॉ के सिद्धांतो से परिचित करवाते हुए समझाया कि तापमान और दबाव के बीच क्या संबंध होता है और उन्होंने यह भी बताया कि नाइट्रोजन गैस से लिक्विड नाइट्रोजन कैसे बनाते हैं. 

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CRISP के दीपक कुमार मिश्रा और मोहित शर्मा ने प्रदर्शनी में पराली से बनी इको फ्रेंडली वस्तुओं के मॉडल के बारे में बताया कि दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में पराली जलाने से बड़ी मात्रा प्रदूषण फैलता है. वहीं इन वस्तुओं के निर्माण के लिए सबसे ज्यादा पेड़ों की कटाई की जाती है. इसलिए पेड़ों की कटाई रोकने और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से पराली से इको फ्रेंडली वस्तुओं का निर्माण शुरू किया है. पराली का इस्तेमाल होम डेकोर और फर्नीचर बनाने में किया जा सकता है. यह लकड़ी का बेहतरीन विकल्प है, जिससे पेड़ों की कटाई को कम किया जा सकता है. 

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पराली से कैसे बनाई जाती है कंपोजिट सामग्री

पराली को सबसे पहले साफ करना होता है, जिसके बाद उसे पॉलीमर में मिलाया जाता है. फिर दबाव और एक निश्चित तापमान से मजबूत शीट या ब्लॉक का निर्माण किया जाता है. ऐसे ही अन्य वस्तुओं को बनाने में पराली का उपयोग किया जाता है. 

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इस विज्ञान महोत्सव में आईआईटी, एनआईटी, आरआरसीएटी, आईआईएसईआर, एमपीसीएसटी, सीआईएसआर, सीआरआईएसपी सहित कई नेशनल लेवल के संस्थानों से डेलीगेट्स शामिल हुए थे. प्रदर्शनी में 15 से अधिक आधुनिक मॉडल और परियोजनाएं प्रस्तुत की गईं थी, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. मौसम विभाग में उपयोग होने वाले Weather Forecast के instruments को भी प्रदर्शित किया गया था. 

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चंद्रयान 3 व एलवीएम 3 के मॉडल बने आकर्षण का केंद्र

विज्ञान महोत्सव में चंद्रयान 3 और एलवीएम 3 रॉकेट के मॉडल भी प्रदर्शित किए गए थे. इन मॉडलों के जरिए भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों, रॉकेट लॉन्च प्रक्रिया और वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई थी.

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इसके अलावा वैज्ञानिक बिनीश राफत ने बताया कि हमें वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्ट करना है तो जंगली जीवों पर होने वाले हमलों को प्रत्यक्ष रूप से दिखाना होगा. उन्होनें कहा कि स्वतंत्र रूप से घूमने वाले पक्षी को मनोरंजन के लिए पालना गलत है. बता दें कि साइंस सेंटर में आयोजित किए गए इस महोत्सव का उद्देश्य लोगों को अपने पर्यावरण के प्रति जागरुक करना और छात्रों की विज्ञान में रुचि बढ़ाना था. 

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