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Future of Indian Economy 2026: साल 2026 को लेकर दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों की नजरें भारत पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। लेकिन एक आम आदमी के लिए 'अर्थव्यवस्था' का मतलब जीडीपी के आंकड़ों से कहीं ज्यादा उसकी थाली की महंगाई और हाथ में आने वाली सैलरी से होता है।
महंगाई का ग्राफ: क्या मिलेगी राहत?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2026 में दाल, चावल और पेट्रोल के दाम कम होंगे? विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 तक वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) काफी हद तक स्थिर हो जाएगी। अगर मानसून सामान्य रहता है और खेती की पैदावार अच्छी होती है, तो खाद्य महंगाई (Food Inflation) में 4% से 5% तक की गिरावट देखी जा सकती है।
हालांकि, तकनीकी सेवाओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से ऊर्जा की कीमतें थोड़ी परेशान कर सकती हैं। संक्षेप में कहें तो, महंगाई पूरी तरह खत्म तो नहीं होगी, लेकिन आपकी जेब पर पड़ने वाला बोझ साल 2024-25 के मुकाबले कम जरूर महसूस होगा।
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रोजगार के नए अवसर: कहाँ खुलेंगे दरवाजे?
साल 2026 युवाओं के लिए 'स्किल और टेक' (Skill and Tech) का साल होने वाला है। पारंपरिक नौकरियों के बजाय, अब 'डिजिटल इकॉनमी' (Digital Economy) में बूम आने की उम्मीद है।
ग्रीन एनर्जी:भारत जिस तरह से सौर ऊर्जा और हाइड्रोजन मिशन पर काम कर रहा है, 2026 तक रिन्यूएबल सेक्टर में लाखों नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): आईटी सेक्टर में अब सिर्फ कोडिंग से काम नहीं चलेगा। जो युवा AI और डेटा साइंस में माहिर होंगे, उनके लिए नौकरियों की बाढ़ आने वाली है।
मैन्युफैक्चरिंग:'मेक इन इंडिया' का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। सेमीकंडक्टर और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की संभावना है।
मध्यम वर्ग और बाजार की स्थिति
2026 में मध्यम वर्ग (Middle Class) की क्रय शक्ति यानी खर्च करने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी आएगी। डिजिटल पेमेंट और ई-कॉमर्स की पहुंच गांवों तक होने से छोटे व्यापारियों के लिए भी नए बाजार खुलेंगे। ब्याज दरों में स्थिरता आने से होम लोन और कार लोन लेना थोड़ा आसान हो सकता है,जिससे आम आदमी का अपना घर खरीदने का सपना पूरा हो सकेगा।
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