Ajit Pawar Controvercy: 300 करोड़ का सौदा, 1800 करोड़ की जमीन और 500 रुपये स्टांप ड्यूटी, पुणे लैंड केस की पूरी कहानी

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनके बेटे की कंपनी से जुड़ा पुणे लैंड डील विवाद चर्चा में है। दलित आरक्षित जमीन, स्टांप ड्यूटी माफी और जांच ने इस मामले को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया।

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Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी की सुबह प्लेन क्रैश हादसे में निधन हो गया है। महाराष्ट्र की राजीनीति में सत्ता के केंद्र में रहने वाला चेहरा थे। मगर अजित पवार की राजनीति में सबसे ताजा और गंभीर विवाद उनके बेटे पार्थ पवार की कंपनी से जुड़े पुणे भूमि सौदे को लेकर सामने आया। पुणे के मुंढवा इलाके में स्थित सरकारी जमीन से जुड़े इस मामले ने न केवल एनसीपी को कानूनी संकट में डाला, बल्कि सत्तारूढ़ महायुति सरकार के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी। यह मामला दलितों के लिए आरक्षित जमीन, भारी रियायतों और स्टांप ड्यूटी माफी के आरोपों के चलते तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

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क्या है पूरा लैंड डील मामला

यह विवाद पार्थ पवार की कंपनी अमेडिया होल्डिंग्स एलएलपी से जुड़ा है, जिसने पुणे के हाई-प्रोफाइल मुंढवा क्षेत्र में करीब 40 एकड़ जमीन लगभग 300 करोड़ रुपये में खरीदी। विपक्ष का आरोप है कि इस जमीन की वास्तविक बाजार कीमत करीब 1,804 करोड़ रुपये थी। इतनी कम कीमत पर सौदा होने को लेकर सवाल उठे कि क्या मंत्री के बेटे को सत्ता का अनुचित लाभ मिला।

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दलितों के लिए आरक्षित ‘वतन भूमि’ पर सौदा

सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह जमीन महार समुदाय के लिए आरक्षित ‘वतन भूमि’ थी। बॉम्बे इनफीरियर विलेज वतन उन्मूलन अधिनियम, 1958 के तहत ऐसी जमीन बिना सरकारी अनुमति के बेची नहीं जा सकती। विपक्ष ने आरोप लगाया कि नियमों को दरकिनार कर यह सौदा कराया गया और इसे दलितों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया गया।

स्टांप ड्यूटी माफी ने गहराया शक

विवाद को और तीखा बना दिया स्टांप ड्यूटी माफी के फैसले ने। बताया गया कि सौदे के महज दो दिन बाद यह कहते हुए छूट दी गई कि जमीन पर डेटा सेंटर बनाया जाएगा। नतीजतन, 300 करोड़ के सौदे पर कंपनी ने केवल 500 रुपये स्टांप ड्यूटी अदा की। इसी आधार पर आरोप लगे कि मंत्री के बेटे को करोड़ों रुपये का अनुचित फायदा पहुंचाया गया।

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विपक्ष ने क्यों बनाया राष्ट्रीय मुद्दा

शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने सवाल किया कि महज 1 लाख रुपये की पूंजी वाली कंपनी इतने महंगे इलाके में आईटी पार्क और डेटा सेंटर बनाने की स्थिति में कैसे आ गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “लैंड थेफ्ट” करार देते हुए कहा कि यह दलितों के अधिकारों की खुली लूट है और स्टांप ड्यूटी माफी इस चोरी को कानूनी मंजूरी देने जैसा है।

अजित पवार और परिवार की सफाई

अजित पवार ने सार्वजनिक रूप से इस सौदे में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे पार्थ पवार और भांजे दिग्विजय पाटिल को यह जानकारी नहीं थी कि जमीन सरकारी और आरक्षित श्रेणी में आती है। उनके अनुसार, जैसे ही कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई, सौदे को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उन्होंने रजिस्ट्रार और तहसील स्तर पर प्रक्रियागत चूक की बात भी कही।

शरद पवार की प्रतिक्रिया और जांच की मांग

एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पूरे मामले की जांच कराकर सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।

बीजेपी की सख्ती और सरकारी कार्रवाई

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आरोपों को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए और साफ कहा कि किसी को बचाया नहीं जाएगा। भाजपा सांसद नारायण राणे ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए अनुशासन की बात कही। राज्य सरकार ने राजस्व और वन विभाग की उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खड़गे कर रहे हैं। समिति यह जांच करेगी कि क्या सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ और किन अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया।

आगे क्या?

सरकारी कार्रवाई के तहत अमेडिया होल्डिंग्स को करीब 42 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। यह मामला केवल एक भूमि सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता, प्रभाव, दलित अधिकार और शासन की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा राजनीतिक सवाल बन चुका है। इसके नतीजे आने वाले समय में अजित पवार की राजनीति और महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों पर गहरा असर डाल सकते हैं।

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