JNMC मेडिकल कॉलेज रायपुर: डॉ. आशीष सिन्हा पर नई शिकायत, सरेंडर तारीख विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

JNMC Raipur Affidavit Controversy: अब सरेंडर तारीख के कथित विरोधाभास और झूठा शपथपत्र देने के आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आगे क्या कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।

JNMC Raipur Affidavit Controversy

JNMC Raipur Affidavit Controversy: रायपुर के पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष सिन्हा एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं।

पहले से छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब उनके खिलाफ शपथपत्र में सरेंडर की तारीख गलत दर्शाने की शिकायत की गई है। इस मामले को लेकर मौदहापारा थाने में FIR के लिए आवेदन दिया गया है।

शपथपत्र में तारीख को लेकर आरोप

मामला उस एफिडेविट से जुड़ा है जो डॉ. सिन्हा ने जमानत मिलने के बाद कॉलेज के डीन और चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त को प्रस्तुत किया था।

आरोप है कि नौकरी बचाने के उद्देश्य से शपथपत्र में आत्मसमर्पण की तारीख 10 सितंबर 2025 दर्शाई गई, जबकि न्यायालयीन रिकॉर्ड में सरेंडर की तारीख 8 सितंबर 2025 दर्ज है।

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दो महीने से अधिक समय तक फरारी

जानकारी के मुताबिक छात्रा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद डॉ. सिन्हा करीब दो महीने से अधिक समय तक फरार रहे। इस दौरान उन्होंने सेशन कोर्ट, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, जिन्हें खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने 8 सितंबर 2025 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया।

कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज हिरासत अवधि

न्यायालयीन दस्तावेजों के अनुसार 8 सितंबर को आत्मसमर्पण के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। 10 सितंबर को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और 12 सितंबर 2025 को नियमित जमानत मंजूर की गई। रिकॉर्ड के अनुसार वे 8 से 12 सितंबर तक हिरासत में रहे, जो 48 घंटे से अधिक की अवधि है।

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दस्तावेजों में विरोधाभास पर उठे सवाल

विवाद इस बात को लेकर है कि शपथपत्र में आत्मसमर्पण की तारीख 10 सितंबर लिखी गई है, जबकि उसी दस्तावेज के साथ संलग्न बेल ऑर्डर में 8 सितंबर स्पष्ट रूप से दर्ज है। एक ही दस्तावेज सेट में तारीखों के इस अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि प्रशासनिक स्तर पर इसे कैसे स्वीकार किया गया।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

बताया जा रहा है कि इस विरोधाभास को लेकर डीन कार्यालय, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को लिखित शिकायत दी गई थी। हालांकि अब तक किसी ठोस विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।

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पहले से दर्ज है यौन उत्पीड़न का मामला

इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि में 4 जुलाई 2025 को दर्ज वह मामला है जिसमें कॉलेज की एक छात्रा ने डॉ. सिन्हा पर छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। मौदहापारा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और 75(2)(3) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

छात्रा ने आरोप लगाया था कि प्रोफेसर उन्हें केबिन में बुलाकर अनुचित व्यवहार करते थे, डिजिटल माध्यम से आपत्तिजनक प्रस्ताव देते थे और शिकायत करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देते थे। बाद में कथित तौर पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया।

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