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बस्तर में 108 कुंडीय महायज्ञ करेंगे बाबा बागेश्वर: नक्सलवाद के खात्मे पर जताया भरोसा, कहा- देश को रामकथा से ज्यादा राष्ट्रकथा की जरूरत

Dhirendra Shastri Statement: बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने छत्तीसगढ़ से बड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब देश को रामकथा से ज्यादा राष्ट्रकथा की जरूरत है।

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Harsh Verma
Dhirendra Shastri Katha Bhilai

Dhirendra Shastri Statement: छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए बाबा बागेश्वर के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री ने रामकथा के साथ-साथ अब राष्ट्रकथा का संदेश देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश को केवल रामकथा नहीं, बल्कि राष्ट्रकथा की ज्यादा आवश्यकता है, क्योंकि प्रभु राम केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि भारत और भारतवासियों के भीतर बसते हैं। देश को एकजुट रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है और इसी उद्देश्य से पूरे देश में राष्ट्रकथा का आयोजन किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ से राष्ट्रकथा का संदेश

धीरेंद्र शास्त्री ने यह बातें छत्तीसगढ़ से कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को मजबूत और एक रखने के लिए समाज को राष्ट्रभाव से जोड़ना जरूरी है। उनका कहना था कि जब राष्ट्र सुरक्षित और संगठित रहेगा, तभी सनातन संस्कृति और रामकथा का संदेश भी स्थायी रूप से आगे बढ़ेगा।

नक्सल ऑपरेशन विजय पर जताया भरोसा

बाबा बागेश्वर ने छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल ऑपरेशन विजय का उल्लेख करते हुए कहा कि अब छत्तीसगढ़ की धरती से नक्सलवाद का नासूर खत्म होने वाला है। उन्होंने दावा किया कि राज्य और केंद्र सरकार ने इसकी समयसीमा तय कर रखी है और उन्हें पूरा भरोसा है कि 31 मार्च तक प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।

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उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवानों के साथ मिलकर जो संकल्प लिया है, वह निश्चित रूप से पूरा होगा।

शहीद जवानों के सम्मान में महायज्ञ

भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान, गृहमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में धीरेंद्र शास्त्री ने घोषणा की कि नक्सल समस्या के खात्मे और देश की सेना की मजबूती के लिए बस्तर में 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह महायज्ञ उन वीर जवानों की स्मृति को समर्पित होगा, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपनी शहादत दी है।

महायज्ञ की विशेष रूपरेखा

महायज्ञ के स्वरूप पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने बताया कि यज्ञशाला सात खंडों में बनाई जाएगी। यज्ञशाला के हर कोने में तिरंगा लहराएगा और सभी खंडों में शहीद जवानों की तस्वीरें लगाई जाएंगी। शहीद जवानों को देवतुल्य मानते हुए उनकी पूजा की जाएगी।

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उन्होंने कहा कि यज्ञ में आहुति देने के लिए ब्राह्मणों की व्यवस्था वे स्वयं करेंगे। सेना को आमंत्रण भी उनके स्तर से दिया जाएगा, जबकि केंद्रीय रक्षा मंत्री को आमंत्रित करने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। पहले दिन की आहुति केंद्रीय रक्षा मंत्री शहीद परिवारों के साथ मिलकर देंगे।

सेना को समर्पित होगी यज्ञ की चढ़ोतरी

धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि महायज्ञ में जो भी चढ़ोतरी और दान प्राप्त होगा, उसे सीधे सेना के राजकोष में जमा किया जाएगा। उनका कहना था कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र और सैनिकों के सम्मान का प्रतीक होगा।

राष्ट्रभाव और एकता पर जोर

बाबा बागेश्वर ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि आज देश को जाति, क्षेत्र और मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रभाव से जुड़ने की जरूरत है। रामकथा के साथ राष्ट्रकथा इसी दिशा में एक प्रयास होगी, जिससे समाज में एकता, समर्पण और देशभक्ति की भावना मजबूत हो सके।

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कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ से दिया गया धीरेंद्र शास्त्री का यह संदेश न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय विमर्श को भी नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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