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छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक भर्ती 2023: 1600 आदिवासी पदों पर नियुक्ति की मांग, राष्ट्रपति और पीएम को पत्र भेजा, आमरण अनशन पर बैठे हैं अभ्यर्थी

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत 1600 अनुसूचित जनजाति पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थी आमरण अनशन पर हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं की गई।

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Harsh Verma
CG Assistant Teacher Recruitment 2023

CG Assistant Teacher Recruitment 2023: छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत रिक्त 1600 आदिवासी पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। पीड़ित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, राज्यपाल रामेन डेका, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर हस्तक्षेप की अपील की है।

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अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अनुसूचित जनजाति वर्ग के पदों पर नियुक्ति नहीं की जा रही है। इससे आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है।

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24 सितंबर से आमरण अनशन

न्यायालयों के आदेशों के बावजूद नियुक्ति न होने से नाराज अभ्यर्थी 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके परिजन और सामाजिक संगठन भी इस आंदोलन में शामिल हैं।

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आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। अनशन के दौरान 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ने की खबर है। कई अभ्यर्थियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है और कुछ की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

हजारों की संख्या में लेटर स्पीड पोस्ट किए गए हैं।

कोर्ट आदेशों की अवहेलना का आरोप

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को भर्ती से संबंधित स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह न्यायालय की अवमानना और संविधान की भावना के विपरीत है।

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सामाजिक और आर्थिक संकट की बात

आदिवासी संगठनों का कहना है कि वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। इससे उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभ्यर्थी कर्ज लेकर तैयारी कर चुके हैं और अब नियुक्ति में देरी से मानसिक तनाव झेल रहे हैं।

प्रमुख मांगें

आंदोलनरत अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि 1600 आदिवासी पदों पर तत्काल नियुक्ति की जाए। साथ ही हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाए।

वे यह भी मांग कर रहे हैं कि अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार ले तथा नियुक्ति में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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आंदोलन तेज करने की चेतावनी

आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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