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CGMSC से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई: हमर लैब योजना में 550 करोड़ के नुकसान का खुलासा, तीन कारोबारी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े बड़े घोटाले में EOW ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मेडिकल उपकरणों की खरीदी में सरकार को करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

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Harsh Verma
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CGMSC Scam Update: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित CGMSC घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। हमर लैब योजना के तहत मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीदी में हुई गंभीर अनियमितताओं के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला शासकीय राशि के दुरुपयोग और टेंडर प्रक्रिया में साजिश से जुड़ा हुआ है।

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ये हैं गिरफ्तार आरोपी

EOW द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अभिषेक कौशल, डायरेक्टर रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, पंचकुला; राकेश जैन, प्रोप्राइटर श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर और प्रिंस जैन, लाइजनर रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। प्रिंस जैन का संबंध मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा से पारिवारिक रूप से बताया गया है।

किन धाराओं में दर्ज है मामला

यह प्रकरण भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 120-बी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए), 13(2) और 7(सी) के तहत दर्ज किया गया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि निविदा प्रक्रिया को प्रभावित कर सरकारी धन का भारी दुरुपयोग किया गया।

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हमर लैब योजना में कैसे हुआ घोटाला

हमर लैब योजना का उद्देश्य आम जनता को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त डायग्नोस्टिक जांच की सुविधा देना था। इसके लिए जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीदी की गई। यह खरीदी पुल टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए की गई, जिसमें मोक्षित कॉर्पोरेशन को ठेका मिला।

EOW की जांच में सामने आया कि रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में भाग लिया और मोक्षित कॉर्पोरेशन को जानबूझकर सहयोग किया। तीनों फर्मों के बीच आपसी समझ और कार्टलाइजेशन के जरिए प्रतिस्पर्धा को खत्म किया गया।

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550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति

जांच में यह भी पाया गया कि तीनों फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पादों का विवरण, पैक साइज, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का पैटर्न लगभग एक जैसा था। यहां तक कि जिन उत्पादों का नाम स्पष्ट नहीं था, उन्हें भी एक समान तरीके से दर्शाया गया। दरें भी एक ही पैटर्न में कोट की गईं, जिससे मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर सामग्री सप्लाई की। इससे शासन को करीब 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

27 जनवरी तक पुलिस रिमांड

गिरफ्तार तीनों आरोपियों को 19 जनवरी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। EOW का कहना है कि जनहित से जुड़ी हमर लैब योजना में हुए घोटाले की जांच आगे भी जारी रहेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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