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रायपुर में धान घोटाले को लेकर NSUI का प्रदर्शन: कार्यकर्ताओं ने चूहे का वेश धारण कर दिया धरना, बोले- खाद्य मंत्री से इस्तीफा लिया जाए

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एनएसयूआई ने अनोखा प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता चूहे का वेश धारण कर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर हंगामा किया।

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Harsh Verma
raipur nsui protest

Raipur NSUI Protest: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एनएसयूआई ने अनोखा प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता चूहे का वेश धारण कर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर हंगामा किया। यह प्रदर्शन धान खरीदी केंद्रों में चूहों के धान खाने के दावे के बाद किया गया। प्रदर्शन के दौरान NSUI नेताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन को “चूहे को न्याय” नाम देते हुए कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा।

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असली दोषियों को बचाने का प्रयास: NSUI

धान घोटाले के विरोध में NSUI का अनोखा प्रदर्शन, चूहे का वेश धारण कर कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ता

इस दौरान एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि करोड़ों रुपये के धान घोटाले में असली दोषियों को बचाने के लिए सारा ठीकरा चूहों पर फोड़ा जा रहा है। यह जनता को गुमराह करने का प्रयास है।  NSUI ने धान घोटाले को सीधे किसानों, छात्र, युवाओं और आम जनता के हितों से जुड़ा गंभीर विषय बताया। 

चूहों को दोषी ठहराना शासन की विफलता: NSUI

संगठन ने अपने ज्ञापन में लिखा कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों और खाद्य विभाग के शीर्ष स्तर की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। आरोप लगाया कि अब तक न तो किसी बड़े अधिकारी पर ठोस कार्रवाई हुई है और न ही किसी की भी जिम्मेदारी तय की गई है। बताया कि चूहों को दोषी ठहराना शासन की विफलता और अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रतीक है।

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ये हैं NSUI की मांगे

  1. धान घोटाले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

  2. घोटाले में संलिप्त सभी अधिकारियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।

  3. नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए खाद्य मंत्री से इस्तीफा लिया जाए।

  4. भविष्य में इस प्रकार के घोटालों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केंद्रों से करोड़ों रुपए के धान गायब

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केंद्रों से करोड़ों रुपए के धान गायब हो गए हैं। कहीं पर कहा गया कि चूहे धान खा गए हैं। जिसके बाद विपक्ष इसे बड़ा घोटाला बता रहा है। तो वहीं, सरकार इसे धान में नमी कम होने और मामूली कीटों से होने वाले प्राकृतिक नुकसान बता रही है। कबीरधाम जिले में करीब 2600 क्विंटल धान कम मिले हैं, जिसकी कीमत सात करोड़ रुपए बताई जा रही है।

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