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CG Shikshak Bharti Ghotala Update: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिल में साल 2007 में हुए शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने 8 प्रधान पाठकों को बर्खास्त कर दिया है। ये सभी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल कर वर्षों से शिक्षा विभाग में पदस्थ थे।
इन प्रधान पाठकों को नौकरी से हटाया
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बर्खास्त प्रधान पाठकों की लिस्ट
लखनलाल साहू ( शासकीय प्राथमिक शाला विश्रामपुर, जिला धमतरी)
ईश्वरी निर्मलकर ( शासकीय प्राथमिक शाला सोनारिनदैहान विख.-मगरलोद, जिला-धमतरी)
मंजू खुंटेर ( शासकीय प्राथमिक शाला मरदा विख.-नगरलोड, जिला-धमतरी )
युकेश (शासकीय प्राथनिक शाला भांठापारा दुधवानराविशख-मगरलोड, जिला-धमठरी)
लता साहू ( शासकीय प्राथमिक शाला खिसोरा वि.ख. मगरलोड जिला-धमतरी)
हेमंत कुमार साहू (शासकीय प्राथमिक शाला करेलीछोटी विख- मगरलोड, जिला-धमतरी )
पुनम सोनवानी (शासकीय प्राथमिक शाला बानापात्रा सिहावा, वर्तमान में पदोन्नति उपरांत शा० प्रा० कर्राघाटी वि.ख- नगरी, जिला धमतरी)
हरिशंकर साहू ( शासकीय प्राथमिक शाला चट्रीबाहरा वि.ख.-नगरी, जिला-धमतरी )
( ये सभी वर्तमान में प्रधान पाठक थे।)
10 अन्य जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार, इस मामले में जांच अभी जारी है और करीब 10 अन्य लोग भी जांच के दायरे में हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र में वर्ष 2007 में हुई शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और गड़बड़ियां सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि कई कैंडिडेट्स ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त की और करीब 19 वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य करते रहे और इस दौरान प्रमोशन लेकर प्रधान पाठक बन गए। इस दौरान वे नियमित रूप से सरकारी वेतन भी लेते रहे।
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आरटीआई के माध्यम से मामले का खुलासा
यह घोटाला आरटीआई के माध्यम से उजागर हुआ था, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। हालांकि, जांच और एफआईआर की प्रक्रिया में करीब एक दशक का समय लग गया। अब लगभग 19 साल बाद इस प्रकरण में 8 आठ प्रधान पाठकों को सेवा से बर्खास्त किया है, जबकि 10 अन्य के खिलाफ जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती के दौरान गठित चयन समितियों में जनपद अध्यक्ष, शिक्षक समिति के सदस्य, प्रधान पाठक और कुछ जनप्रतिनिधि भी शामिल थे। आरोप है कि इन सभी ने संगठित होकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती की और प्रक्रिया के दौरान भारी लेनदेन किया।
बताते हैं, इस घोटाले में पूर्व में भी कई शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब एक बार फिर की गई इस बड़ी कार्रवाई से क्षेत्र में फर्जी शिक्षकों और प्रधान पाठकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगे और संदिग्ध लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
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