ACB EOW की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में फरार तहसीलदार और नायब तहसीलदार गिरफ्तार

(रिपोर्ट: अनंत, रायपुर) ACB EOW ACTION: भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में ACB-EOW ने फरार तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार किया। दोनों पर फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों के घोटाले का आरोप है।

Bharatmala Compensation Scam

ACB EOW ACTION: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले में ACB-EOW ने बड़ी कार्रवाई सामने आई है,जहां फरार चल रहे तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें, दोनों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर और नियमों में हेरफेर कर मुआवजा राशि का अवैध आहरण कराने का आरोप है। जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 

लंबे समय से फरार थे दोनों अधिकारी

जांच एजेंसी के मुताबिक दोनों आरोपी लंबे समय से फरार थे और गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहे थे। बता दें, इससे पहले इनकी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी थी।

जिसके बाद स्पेशल कोर्ट ने इनके खिलाफ स्थायी वारंट और प्रोक्लेमेशन आदेश जारी किया था। न्यायिक प्रक्रिया के बावजूद फरारी जारी रहने पर ACB-EOW ने सघन अभियान चलाकर दोनों को धर दबोचा।

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अन्य अधिकारियों को लेकर पूछताछ जारी 

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। ACB-EOW अधिकारियों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान मुआवजा वितरण से जुड़े दस्तावेजों, फर्जी लाभार्थियों और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य अधिकारियों व दलालों की भूमिका को लेकर विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में कई अहम नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

भुगतान के दौरान व्यापक स्तर पर धोखाधड़ी

दरअसल, भारत सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत सड़क और हाईवे निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण किया गया था। इसी प्रक्रिया में मुआवजा निर्धारण और भुगतान के दौरान व्यापक स्तर पर धोखाधड़ी और हेराफेरी के आरोप सामने आए।

जांच में यह पाया गया कि अधिकारियों, भू-माफिया और दलालों की मिलीभगत से जमीन के कागजात और मूल्य में जानबूझकर गड़बड़ी की गई।

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मीन मालिकों की जगह फर्जी नाम जोड़े 

जांच एजेंसी के मुताबिक कई मामलों में वास्तविक जमीन मालिकों की जगह फर्जी नाम जोड़कर या दस्तावेजों में हेरफेर कर कई गुना अधिक मुआवजा निकाला गया। नकली मालिक बनाकर भुगतान कराया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

इस घोटाले में एसडीएम, पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिनकी जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है।

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अधिग्रहण कानून का दुरुपयोग घोटाले को अंजाम दिया

विशेषज्ञों के अनुसार, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य से दो से चार गुना तक और शहरी क्षेत्रों में लगभग दो गुना तक दिया जाता है। 

इसके अलावा 100 प्रतिशत अतिरिक्त राशि, फसल, पेड़ या मकान का अलग से भुगतान और पुनर्वास राशि का भी प्रावधान है। आरोप है कि इन्हीं प्रावधानों का दुरुपयोग कर मुआवजा घोटाले को अंजाम दिया गया।

मामला जांच और न्यायालय में विचाराधीन है

ACB-EOW ने स्पष्ट किया है कि ये मामला अभी जांच और न्यायालय में विचाराधीन है। पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों, दलालों तथा लाभार्थियों पर कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ACB-EOW

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