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रायगढ़ के तमनार मामले पर हाईकोर्ट सख्त: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की कड़ी नाराजगी, महाधिवक्ता को किया तलब, पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

रायगढ़ जिले के तमनार में हुए विवादित पुलिस एक्शन को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने घटना पर नाराजगी जताते हुए शासन की ओर से महाधिवक्ता को तलब करने के निर्देश दिए।

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Harsh Verma
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Raigarh Tamanar Case: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में सामने आई विवादित घटना अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। इस मामले को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान माहौल उस समय गंभीर हो गया, जब चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने पुलिस की कार्रवाई पर खुलकर नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं किसी भी हाल में उचित नहीं कही जा सकतीं।

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अभनपुर मामले की सुनवाई के दौरान उठा तमनार प्रकरण

दरअसल, हाईकोर्ट में राजधानी रायपुर के अभनपुर थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर मामले की सुनवाई चल रही थी। इस प्रकरण में टोनहा और तांत्रिक होने के आरोप में एक व्यक्ति को निर्वस्त्र कर घुमाने का आरोप लगा था, जिस पर एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़ित पक्ष ने इस घटना को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान तमनार की घटना का भी जिक्र हुआ, जिसने कोर्ट का ध्यान खींचा।

तमनार में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में महिला आरक्षक पर हमले और वर्दी फाड़ने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मुख्य आरोपी को पुलिस ने सड़क पर केवल अंडरवियर और फटी बनियान में लिपस्टिक पोतकर जुलूस के रूप में घुमाया। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में इसे लेकर बहस शुरू हो गई थी।

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चीफ जस्टिस की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने तल्ख लहजे में कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर इस तरह की सार्वजनिक अपमानजनक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि पुलिस को भी कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करनी चाहिए। डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीर मानते हुए शासन से जवाब तलब करने का निर्णय लिया।

महाधिवक्ता को किया तलब

चीफ जस्टिस ने शासन की ओर से मौजूद अधिवक्ता को निर्देश दिए कि इस मामले में सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में उपस्थित किया जाए। कोर्ट का यह कदम साफ तौर पर दिखाता है कि न्यायालय इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है और पूरे घटनाक्रम की गहराई से समीक्षा करना चाहता है।

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