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Saumya Chaurasia Bail: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रह चुकी सौम्या चौरसिया ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
13 जनवरी तक अंतरिम राहत
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कोर्ट ने अंतिम आदेश आने तक सौम्या चौरसिया को अंतरिम राहत प्रदान की है। अब इस मामले में 13 जनवरी को फैसला सुनाया जाएगा। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सौम्या चौरसिया को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। वहीं, शासन की ओर से अदालत में अपना जवाब पेश करते हुए ईडी और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी और आवश्यक बताया गया।
ईओडब्ल्यू की गिरफ्तारी और प्रोडक्शन वारंट
दरअसल, शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही EOW ने उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर लेने के लिए प्रवर्तन निदेशालय की स्पेशल बेंच में आवेदन भी प्रस्तुत किया है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
राजनीतिक साजिश का आरोप
सौम्या चौरसिया की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने हाईकोर्ट में कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है। उन्होंने दलील दी कि ईडी की जांच राजनीतिक दबाव में की गई और बाद में सुनियोजित तरीके से सौम्या चौरसिया को फंसाने के लिए केस EOW को सौंपा गया। वकील ने यह भी कहा कि ढाई साल पुराने इस मामले में सौम्या चौरसिया की कोई सीधी भूमिका नहीं है, इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है।
शराब घोटाले की जांच की पृष्ठभूमि
ईडी की जांच में यह सामने आया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस सिंडिकेट के माध्यम से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
13 जनवरी से ट्रायल की शुरुआत
गौरतलब है कि शराब घोटाले से जुड़े मामलों का ट्रायल भी 13 जनवरी से शुरू होने वाला है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला न सिर्फ सौम्या चौरसिया बल्कि पूरे मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।
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