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Durg Hospital Negligence: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित श्रेया अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि महिला का ऑपरेशन होने के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं दिया गया। जब स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तब उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया।
अधूरी एंबुलेंस और बिना डॉक्टर रेफर करने का आरोप
परिजनों के अनुसार, महिला को जिस एंबुलेंस से रेफर किया गया, उसमें न तो पर्याप्त जीवन रक्षक उपकरण थे और न ही कोई डॉक्टर मौजूद था। गंभीर हालत में महिला को दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज और सुविधाएं मिल जातीं, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
डॉक्टर और प्रबंधन पर दर्ज हुआ मामला
इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने अस्पताल के डॉक्टर डॉ. अभिषेक पांडे और अस्पताल प्रबंधक मनीष राजपूत के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
अधिवक्ताओं ने जताई कड़ी आपत्ति
स्थानीय अधिवक्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस मामले में बेहद हल्की धाराएं लगाई गई हैं। वकीलों का कहना है कि यह प्रकरण साधारण लापरवाही का नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक लापरवाही का है, जो सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवा संस्थान (नियमन तथा नियंत्रण) अधिनियम, 2010 के दायरे में आता है।
अधिनियम की धारा 13 का हवाला
अधिवक्ताओं के मुताबिक, अधिनियम की धारा 13 में साफ प्रावधान है कि यदि किसी अस्पताल या क्लिनिकल संस्थान की लापरवाही से मरीज की हालत बिगड़ती है या उसकी मौत होती है, तो संबंधित संस्था का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इसके साथ ही दंडात्मक कार्रवाई और आर्थिक जुर्माने का भी प्रावधान है।
रेफर करने में भी कानून का उल्लंघन
वकीलों का यह भी कहना है कि बिना पर्याप्त संसाधन, डॉक्टर और जीवन रक्षक उपकरणों के मरीज को रेफर करना कानून का सीधा उल्लंघन है। इसके अलावा धारा 7(1) के तहत पीड़ित पक्ष को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराने और आपराधिक कार्रवाई की मांग करने का अधिकार भी है।
कोर्ट जाने की चेतावनी
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा है कि यदि पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराएं नहीं जोड़ीं, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और मरीज की जान खतरे में न पड़े।
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