छत्तीसगढ़ में मेडिकल PG पर संकट: कांग्रेस ने जताई ‘जीरो ईयर’ की आशंका, नियमों में बदलाव से काउंसलिंग अटकी

छत्तीसगढ़ में मेडिकल PG एडमिशन 2025 को लेकर असमंजस गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने नियमों में बार-बार बदलाव से ‘जीरो ईयर’ की आशंका जताई है। मामला सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित है, जिससे काउंसलिंग अटकी हुई है और छात्रों की चिंता बढ़ गई है।

CG Medical PG

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CG Medical PG: छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेजों की स्नातकोत्तर (PG) प्रवेश प्रक्रिया इस समय गंभीर असमंजस के दौर से गुजर रही है। काउंसलिंग शुरू हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन नियमों में लगातार किए गए बदलावों के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। कांग्रेस ने आशंका जताई है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इस साल मेडिकल PG में ‘जीरो ईयर’ जैसी स्थिति बन सकती है।

नियम बदले, काउंसलिंग अटकी

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि PG काउंसलिंग (PG Admissions 2025) के दौरान बार-बार नियमों में संशोधन किए गए, जिससे छात्रों में भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हुई। स्थिति इतनी जटिल हो गई कि मामला सुप्रीम कोर्ट और बिलासपुर हाईकोर्ट तक पहुंच गया। कांग्रेस का कहना है कि प्रशासनिक अस्थिरता का सीधा नुकसान मेडिकल छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

राज्य कोटे में कटौती पर उठा विवाद

कांग्रेस के अनुसार, अखिल भारतीय मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य कोटे की सीटों में बदलाव किया। पहले जहां छत्तीसगढ़ में MBBS करने वाले छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीटें सुरक्षित थीं, वहीं अब यह हिस्सा घटकर 25 प्रतिशत रह गया है। विपक्ष का दावा है कि यह व्यवस्था देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में अलग है और स्थानीय छात्रों के हितों के खिलाफ जाती है।

न्याय की उम्मीद में कोर्ट पहुंचे छात्र

डॉ. गुप्ता ने बताया कि इसी बदलाव के कारण कई छात्र न्याय की मांग को लेकर अदालत पहुंचे हैं। हाल की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में राज्य सरकार को हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की बात कही गई थी, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि इसमें अब तक देरी हो रही है। अगर यह याचिका जल्द दाखिल नहीं हुई, तो छात्रों को मार्च तक अगली सुनवाई का इंतजार करना पड़ सकता है और तब तक PG एडमिशन प्रक्रिया ठप रह सकती है।

कांग्रेस की मांग: 50-50 का फॉर्मूला लागू हो

कांग्रेस ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के लिए कम से कम 50 प्रतिशत सीटें राज्य कोटे में सुरक्षित रखी जाएं और शेष 50 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया कोटे में जाएं, जैसा कई अन्य राज्यों में किया जाता है। पार्टी का कहना है कि समय रहते फैसला नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर प्रदेश के मेडिकल छात्रों और भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा।

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नए नियमों से बढ़ी उलझन

हाल ही में राज्य सरकार ने मेडिकल स्नातकोत्तर प्रवेश नियम 2025 में संशोधन का गजट नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके बाद राज्य कोटे की सीटें 50 प्रतिशत से घटकर 25 प्रतिशत कर दी गईं। पहले सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटें सिर्फ छत्तीसगढ़ से MBBS करने वाले छात्रों के लिए थीं, लेकिन अब बाहरी छात्रों को भी अधिक अवसर मिलेगा।

निजी मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों का गणित बदलने वाला है। भिलाई और रायपुर के निजी कॉलेजों में राज्य कोटे और अन्य कोटे की सीटों के अनुपात को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे अधिकारी और छात्र दोनों ही असमंजस में हैं।

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समय पर फैसला नहीं हुआ तो बढ़ेगा संकट

कांग्रेस ने साफ किया है कि यह उसकी आशंका और आकलन है, लेकिन यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो मेडिकल PG में पढ़ाई का एक पूरा साल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में हजारों मेडिकल छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है।

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