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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम आदेश: कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में आगे नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगाई रोक, जानें क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती 2023 को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। फिजिकल टेस्ट में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है।

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Harsh Verma
Bilaspur High Court

CG Constable recruitment Scam: छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। Chhattisgarh High Court ने वर्ष 2023 की कांस्टेबल भर्ती में आगे किसी भी प्रकार का नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। यह आदेश फिजिकल टेस्ट में कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए दिया गया है।

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राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2023 में करीब 6000 कांस्टेबल पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। लिखित परीक्षा के बाद फिजिकल टेस्ट आयोजित किए गए, लेकिन इसी चरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। आरोप है कि फिजिकल टेस्ट निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए और कई अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से लाभ पहुंचाया गया।

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आउटसोर्स कंपनी पर गंभीर आरोप

फिजिकल टेस्ट के दौरान डेटा रिकॉर्डिंग का काम Times Technology Private Limited को सौंपा गया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी ने निष्पक्षता नहीं बरती और पैसों के लेन-देन के जरिए कुछ अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए गए। इतना ही नहीं, यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनी द्वारा CCTV फुटेज तक डिलीट कर दिए गए, जिससे जांच में बाधा पहुंची।

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इन अनियमितताओं से आहत सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से याचिका दायर की।

सुनवाई में क्या दलीलें दी गईं

याचिका पर सुनवाई 27 जनवरी 2026 को Justice Parth Pratim Sahu की कोर्ट में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि शासन की जांच रिपोर्ट में खुद बिलासपुर जिले के पुलिस अधीक्षक ने माना है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान गंभीर गड़बड़ियां हुईं और गलत डेटा दर्ज किया गया।

कोर्ट को बताया गया कि शासन की कार्रवाई में कुल 129 ऐसे अभ्यर्थी सामने आए हैं, जिन्हें अनुचित तरीके से ज्यादा अंक दिए गए। पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 के तहत यदि भर्ती में अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द कर नई भर्ती कराई जानी चाहिए।

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भर्ती नियमों के खिलाफ अंतिम सूची

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया का समापन, अंतिम सूची जारी करना और नियुक्ति आदेश निकालना पुलिस भर्ती नियम 2007 के प्रावधानों के खिलाफ है। उनका दावा है कि अगर निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी या CBI से जांच कराई जाए, तो इससे भी बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।

सभी दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक कांस्टेबल पदों पर किसी भी प्रकार की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश से हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।

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