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जांजगीर चांपा में बड़ा घोटाला: मुख्यमंत्री श्रमिक योजना में फर्जीवाड़ा, दस्तावेजों में हेरफेर कर मृत महिला के नाम पर  निकाली सहायता राशि

(रिपोर्ट: राजेश्वर तिवारी, जांजगीर चांपा) जांजगीर चांपा में मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मृत महिला के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक लाख रुपये की सहायता राशि निकाले जाने का आरोप है।

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Shantanu Singh
Chattisgarh (CG) Crime News

Chattisgarh (CG) Crime News: छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मृत महिला के नाम पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर योजना की एक लाख रुपये की सहायता राशि निकाले जाने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले को जांजगीर चांपा के उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया ने सार्वजनिक करते हुए जिला प्रशासन और पुलिस से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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फर्जी दस्तावेजों के सहारे पंजीयन का आरोप

शिकायत के अनुसार विकासखंड बम्हनीडीह निवासी स्वर्गीय सुमन बाई पटेल के नाम पर श्रम विभाग में पंजीयन कराया गया। आरोप है कि महिला की वास्तविक मृत्यु तिथि पूर्व की होने के बावजूद दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया गया और उसी आधार पर योजना के तहत सहायता राशि स्वीकृत करा ली गई।

उपलब्ध दस्तावेजों में निर्माण कर्मकार मंडल का पंजीयन पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और बैंक संबंधी विवरण संलग्न बताए गए हैं। आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर एक लाख रुपये की सहायता राशि संबंधित खाते में अंतरित कर दी गई।

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मृत्यु तिथि और दस्तावेजों में गड़बड़ी

शिकायत में कहा गया है कि मृत्यु की वास्तविक तिथि और पंजीयन की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां हैं। आरोप है कि पहले से दिवंगत महिला के नाम पर बाद में श्रमिक पंजीयन कराया गया और योजना का लाभ लिया गया। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह शासन की जनकल्याणकारी योजना का खुला दुरुपयोग माना जाएगा।

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श्रम विभाग की भूमिका पर सवाल

मामले में विभागीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है। गगन जयपुरिया का कहना है कि बिना अधिकारियों की संलिप्तता के इस तरह का प्रकरण संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि श्रम विभाग से जुड़े दलालों और कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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एफआईआर और रिकवरी की मांग

शिकायतकर्ता ने दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने, निकाली गई राशि की रिकवरी करने और जिलेभर में श्रमिक योजनाओं की विशेष जांच एवं ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो शासन की योजनाओं में इस तरह की अनियमितताएं और बढ़ सकती हैं।

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गरीब श्रमिकों के हक पर डाका नहीं

गगन जयपुरिया ने कहा कि प्रदेश में सुशासन की सरकार है और गरीब एवं श्रमिकों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद जांच किस स्तर तक पहुंचती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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