बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पटवारी से राजस्व निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा रद्द, भाई-भतीजावाद के आरोपों के बीच 216 पदोन्नतियां समाप्त

छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पटवारी से राजस्व निरीक्षक बनने की परीक्षा को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

CG Patwari to RI Promotion

CG Patwari to RI Promotion: छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे से जुड़ा एक अहम फैसला बिलासपुर हाई कोर्ट से सामने आया है। हाईकोर्ट ने पटवारी से राजस्व निरीक्षक (आरआई) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा और पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। यह फैसला न्यायालय की एकल पीठ जस्टिस एनके व्यास ने सुनाया है।

इस निर्णय के बाद वर्ष 2023-24 में पदोन्नत किए गए 216 पटवारियों की पदोन्नति स्वतः समाप्त मानी जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इसमें भाई-भतीजावाद व पक्षपात के संकेत मिले हैं।

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पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा प्रणाली दूषित थी। कोर्ट के अनुसार, चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में मनमानी बरती गई, कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिया गया और योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया। इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को ही संदेह के घेरे में रखा।

राजस्व निरीक्षक पद की जिम्मेदारी का हवाला

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राजस्व निरीक्षक का पद केवल एक प्रशासनिक पद नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भूमि रिकॉर्ड, सीमांकन, नामांतरण और विवादों से जुड़ा हुआ जिम्मेदारीपूर्ण पद है। ऐसे पद पर नियुक्ति के लिए योग्यता, पारदर्शिता और ईमानदारी सबसे अहम मापदंड होने चाहिए।

कोर्ट ने माना कि जब परीक्षा और चयन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो ऐसे पदोन्नत अधिकारियों को प्रशिक्षण पर भेजना या उन्हें पद पर बनाए रखना उचित नहीं है।

216 पदोन्नतियों पर तत्काल प्रभाव

इस फैसले का सीधा असर उन 216 पटवारियों पर पड़ेगा, जिन्हें इस प्रक्रिया के तहत राजस्व निरीक्षक बनाया गया था। कोर्ट के आदेश के अनुसार, उनकी पदोन्नति स्वतः समाप्त मानी जाएगी। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की खामियों के आधार पर लिया गया है।

नई परीक्षा कराने की छूट

हाईकोर्ट ने राज्य शासन को राहत देते हुए यह छूट दी है कि वह पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित कर सकता है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नई परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक परीक्षाओं में तकनीक और स्पष्ट नियमों का सहारा लिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

राजस्व विभाग में हलचल

इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग (Chhattisgarh Revenue Department) में हलचल मच गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर तय की जाएगी।

यह फैसला न केवल राजस्व विभाग, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि पदोन्नति और चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

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