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Cotton Harvesting Machine launch bhopal: महाशिवरात्रि (15 फरवरी) पर देश के किसानों के लिए बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। खास तौर से कपास की खेती करने वालों के लिए भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) के साइंटिस्ट ने कपास हार्वेस्टिंग मशीन तैयार की है। जो किसानों की मेहनत और वक्त दोनों बचाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने X पोस्ट कर यह जानकारी दी और कपास हार्वेस्टिंग मशीन किसानों को समर्पित की।
आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भोपाल स्थित ICAR - केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कपास हार्वेस्टिंग मशीन किसानों को समर्पित की।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) February 15, 2026
अब तक कपास की तुड़ाई हाथ से करनी पड़ती थी। इसमें समय तथा श्रम भी अधिक लगता था और लागत भी बढ़ जाती थी। किसानों… pic.twitter.com/BeBsB6D211
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने X पोस्ट पर जानकारी देते हुए बताया कि आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भोपाल स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कपास हार्वेस्टिंग मशीन किसानों को समर्पित की।
अब तक कपास की तुड़ाई हाथ से करनी पड़ती थी। इसमें समय तथा श्रम भी अधिक लगता था और लागत भी बढ़ जाती थी। किसानों की लंबे समय से मांग थी कि ऐसी मशीन बने, जिससे कपास हार्वेस्ट आसान हो सके। आज वह मांग पूरी हुई है।
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यह मशीन जल्द ही किसानों के लिए उपलब्ध होगी। मैंने स्वयं मशीन से कपास निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। यह तकनीक न केवल समय बचाएगी, बल्कि लागत कम कर कपास की खेती को अधिक लाभदायक बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
साथ ही, कपास का उत्पादन बढ़ाने के लिए हम ऐसी नई वैरायटी विकसित कर रहे हैं, जो रोग प्रतिरोधी हो और अधिक उत्पादन दे सके। प्रति एकड़ अधिक पौधे लगाने पर भी कार्य जारी है, ताकि किसान भाइयों की आय में वृद्धि हो।
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मप्र के किसानों को मिलेगा लाभ
जानकार बताते हैं विकसित कपास हार्वेस्टिंग मशीन किसानों के लिए बड़ा वरदान साबित हो सकती है। इससे किसानों को मेहनत कम करनी पड़ेगी और समय की भी बचत होगी। इसका बड़ा लाभ मप्र के किसानों को मिलेगा।
महाराष्ट्र में घटा कपास का उत्पादन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा मेहतन और मशीनीकरण की कमी के कारण महाराष्ट्र के किसानों को कपास की खेती से मुंह मोड़ना पड़ा और वे सोयाबीन की खेती करने के लिए मजबूर हुए। इससे महाराष्ट्र पिछले चार साल में 4.59 हेक्टेयर में कम कपास की खेती की गई। आंकड़ों के अनुसार साल 2020-21 में महाराष्ट्र में 45.45 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की गई, जिसका उत्पादन 101.05 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) था। जो रकबा साल 2024-25 में घटकर 40.86 लाख हेक्टेयर रह गया और अनुमानित उत्पादन 87.63 लाख गांठ हुआ।
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