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World Largest Pottery : एक समय था जब गर्मियों के मौसम में लोग मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते थे। लेकिन आज के आधुनिक दौर में बॉटर कूलकर, फ्रेजर से लोग पानी ठंडा कर अपनी प्यास बुझा रहे है। लेकिन मिट्टी के घड़े के ठंड़े पानी की बात ही कुछ अलग है। अब आप सोच रहे होंगे की हम मिट्टी के घड़े की बात क्यों कर रहे है... वो इसलिए क्योंकि आपने छोटे-मोटे घड़े तो बहुत देखे होंगे लेकिन क्या आपने कभी टैंकर की साईज का मिट्टी का घड़ा देखा है। जी हां टैंकर के साईज का मिट्टी का घड़ा जो दुनिया का सबसे बड़ा और पुराना घड़ा माना जाता है।
कुषाण वंश का हैं घड़ा
टैंकर के साईज का घड़ा सुनकर आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन यह सच है। इतना बड़ा घड़ा उत्तरप्रदेश के कन्नौज (Kannauj Museum) में रखा हुआ है। इसे आप दुनिया का सबसे बड़ा घड़ा भी कह सकते हैं। दरअसल, यह घड़ा कन्नौज के एक म्यूजियम (Kannauj Museum) में रखा हुआ है। यह घड़ा इतना बड़ा है कि इसमें दो हजार लीटर पानी भरकर रखा जा सकता है। यह घड़ा करीब दो हजार साल पुराना है जो कुषाण वंश का घड़ा है यह विशाल घ्ड़ा 40 साल पहले शेखपुरा मोहल्ले में खुदाई के दौरान मिला था। बताया जाता है कि यह घड़ा पहली से तीसरी सदी के बीच के कुषाण वंश के दौरान का है। इस घड़े को कन्नौज में नए बने म्यूजियम (Kannauj Museum) में कांच के घेरे में सहेज कर रखा गया है। इस घड़े की ऊंचाई 5.4 फीट और चौड़ाई 4.5 फीट है।
खुदाई में मिले थे 40 से अधिका बर्तन
यहां हुई खुदाई के दौरान करीब दो हजार साल पहले के कनिष्क के शासन के 40 से अधिक बर्तन मिले थे। उससे पहले गुप्त काल में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के बर्तन भी मिले थें। यहां कुषाण वंश से भी पहले यानी 1500 ईसा पूर्व के बर्तनों के अवशेष मिले चुके है।
पानी जमा करने के लिए होता था विशाल मटकों का इस्तेमाल
इतिहास और जानकारों के अनुसार दुनिया में अब तक इससे बड़े और पुराने घड़े होने का सुबूत नहीं मिला है। शोध के दौरान इस घड़े की उम्र का आंकलन किया गया तो पता चला कि यह करीब दो हजार साल पहले 78 ई. से 230 ई. के बीच का है। उस दौर में गंगा नदी शहर के करीब से गुजरती थीं। उस दौर में इन घड़ों का इस्तेमाल पानी को जमा करने के लिए किया जाता था। हालांकि आपको बता दें कि कन्नौज म्यूजियम का अब तक उद्घाटन नहीं हो सका है। इसलिए बहुत की कम लोगों को इस विशाल घड़े के बारे में नहीं पता है। इस म्यूजियम (Kannauj Museum) का निर्माण साल 2016 में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते करवाया था। म्यूजियम (Kannauj Museum) तो तैयार हो गया लेकिन इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं हो सकता है।
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