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World Food Safety Day 2024: हम हर साल क्‍यों मनाते हैं विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस? जानें इस दिन कहानी, इतिहास

World Food Safety Day 2024: हम हर साल क्‍यों मनाते हैं विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस? जानें इस दिन कहानी, इतिहास

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Sanjeet Kumar
World Food Safety Day 2024: हम हर साल क्‍यों मनाते हैं विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस? जानें इस दिन कहानी, इतिहास

   हाइलाइट्स

  • 2019 में पहली बार मनाया खाद्य सुरक्षा दिवस
  • असुरक्षित खाद्य से लाखों लोग होते हैं बीमार
  • कोविड-19 के बाद विश्‍व में और बढ़ी भुखमरी
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World Food Safety Day 2024: हम हर साल 7 जून को विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाते हैं। इस दिन का मनाने का मोटो यह है कि हमारा भोजन कितना खाने योग्य है।

इससे हमें कितना पोषण मिलेगा। शुद्ध खाद्य पदार्थ सेवन करने की याद दिलाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस की स्थापना की है।

इसके साथ ही हर साल इस दिवस पर यह याद दिलाने का भी प्रयास किया कि खाद्य के उत्पादन से उसके हमारी प्‍लेट्स तक पहुंचने तक हमें सजग रहने का क्‍या महत्व है।

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खाद्य को उगाने, उसके भंडारण (World Food Safety Day 2024) की व्यवस्था, वितरण जैसी सभी प्रक्रियाओं में कई लोग काम करते हैं।

इस व्‍यवस्‍था के बीच हमारी लापरवाही या फिर कोताही बरतने से हमारा भोजन असुरक्षित और जहरीला भी हो सकता है।

आइए जानते हैं कि इस विशेष दिन विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस का हमारे जीवन में क्‍या है महत्‍व-

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   इस विशेष दिवस का इतिहास

बता दें कि इस बार 7 जून 2024 विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day 2024) की थीम खाद्य सुरक्षा घटनाओं पर ध्यान आकर्षित करने को लेकर है।

इस साल की थीम खाद्य सुरक्षा घटनाओं के लिए तैयार रहने के महत्व को बताती है। इसी से जुड़े कृषि के क्षेत्र अधिकारी (AFO) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) खाद्य मानक कार्यक्रम को लागू करने वाले कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन (CAC) ने 2016 में विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाने के लिए दिए गए प्रस्ताव का समर्थन किया।

इसके बाद जुलाई 2017 में खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के सम्मेलन इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। अंततः 20 दिसंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपने-अपने संकल्प 73/250 में विश्व खाद्य दिवस की स्थापना की थी।

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इसके बाद 7 जून 2019 को पहली बार विश्व खाद्य दिवस (World Food Safety Day 2024) मनाया। जिसे खाद्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के वैश्विक प्रयासों में एक माइल स्टोन के रूप में माना गया।

   खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना

विश्‍व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day 2024) मनाने का उद्देश्‍य खाद्य सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

खाद्य जनित रोगों पर नियंत्रण के उपायों को प्रोत्साहित करना उद्देश्‍य है, इसको इन प्रमुख बिंदओं से समझ सकते हैं-

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स्वास्थ्य सुरक्षा-: हम जो भी खाद्य पदार्थ सेवन करते हैं, यह एक सुरक्षा पर निर्भर करता है। इसमें सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य लोगों को कई तरह की बीमारी से बचाता है। इससे अस्‍वच्‍छ खाद्य के सेवन से उत्पन्न रोगों के कारण हर साल लाखों लोग प्रभावित हो जात हैं।

आर्थिक लाभ-: खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे ज्‍यादा खर्च होता है, सुरक्षित खाद्य लेने से चिकित्सा खर्चों में भी कमी आती है, आपकी हेल्‍थ भी हेल्‍दी रहती है। इससे आर्थिक स्थिरता भी हमेशा रहती है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था-: खाद्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने खाद्य उत्पादों का वैश्विक व्यापार में बढ़ोतरी मिलती है।  हमारे निर्यात को भी प्रोत्साहित करता है।

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खाद्य उत्‍पादन-: सुरक्षित खाद्य उत्पादन तकनीकों को यदि हम अपनाते हैं तो हमारे कृषि में भी सुधार होता है। इससे खाद्य आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ती है और इसकी डिमांड भी ज्‍यादा रहती है।

सामाजिक महत्व-: अभी तक ये सामने आया है कि खाद्य सुरक्षा से संबंधित समस्याएं सबसे अधिक गरीबों को प्रभावित कर रही हैं, सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराने से हमारा समाज समृद्ध और खुशहाल रहता है।

पर्यावरण संरक्षण-: सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य उत्पादन से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है, यदि होता है भी तो वह बहुत ही कम मात्रा में होता है। इसमें संसाधनों का भी बेहतर उपयोग कर सकते हैं।

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   इन खाद्य संकटों से जूझ रहा विश्‍व

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खाद्य संकट (World Food Safety Day 2024) के बदतर स्तर का सामना करने वालों की संख्या में 2021 के बाद से 35 प्रतिशत की वृद्धि मानी गई है।

इसमें 58 देशों के 258 मिलियन लोग प्रभावित हो रहे हैं। विश्‍व में हर तीसरा व्‍यक्ति किसी न किसी तरह से कुपोषण का शिकार है।

खाद्य असुरक्षा के संकट का सबसे अधिक सामना कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), इथियोपिया, अफगानिस्तान, नाइजीरिया और यमन कर रहे हैं।

हर साल लगभग 600 मिलियन (60 करोड़) लोग असुरक्षित भोजन खाने से बीमार हो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के द्वारा जानकारी दी कि 2022 में करीब 828 मिलियन लोग भूखमरी का शिकार थे।

अब यह संख्‍या COVID-19 के संक्रमणकाल और जलवायु परिवर्तन के चलते और बढ़ गई है।

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