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मृत्यू निश्चित है, यह पल संसार में सत्य है। मृत्यु को न तो बदला जा सकता है, और न ही टाला जा सकता हैं। और जब किसी अपने ही की मृत्यू होती है और उस गंभीर माहौल में कई ऐसी चीजे होती है। जिनके बार में शायद ही कम लोगों को पता है। शायद ये बाते आपको भी नहीं पता होंगी की जब शवयात्रा निकाली जाती है तो उस पर फूल, मखाने और सिक्के क्यों फेंके जाते है। आपने भी देखा होता कि राह चलता कोई मनुष्य अगर शवयात्रा देख ले तो वे उसे प्रणाम करता है। और कई लोग सिक्के भी फेंकते है। तो आइए जानते है इसका कारण क्या है।
हिंदू धर्म एक ऐसा प्राचीन धर्म है। जिसके कई सिद्धांतों को कहीं न कहीं वैज्ञानिक रूप से भी साबित किया जा चुका है। इसलिए आप कह सकते है कि इस धर्म में कही गई और लोगों द्वारा अपनाई जाने वाली हर बात के पीछे एक अलग मतलब होता है। अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि जो लोग इन बातों का मतलब नहीं जानते वो इस पर सवाल उठाने लगते है लेकिन ऐसा नहीं है कि सवाल उठाना गलत हैं। बल्कि ये जरूर है कि अगर आपकों जानकारी न हो तो पहले सवाल का जबाव ढूंढे और फिर सही और गलत की पहचान करें। जब शवयात्रा में शव पर सिक्के फेंके जाते है तो कई लोग इसे पैसों की बर्वादी बताने लगते है। ये ठीक उसी तरह है जैसे शिवलिंग पर चढ़ने वाले दूध, मजार में चढाई जाने वाली चादर को लोग किसी गरीब को दान देने की सलाह देने लगते है। जबकि दोनों अपनी-अपनी जगह पर अलग महत्व रखते है। ये बाते इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मृत्यू के बाद आपके साथ न तो आपका ज्ञान जाता है और न ही आपका धन अगर आपके पास कुछ होता है, तो वह है आपके कर्मो का फल मतलब इस धरती पर आपने जो भी अच्छे या बुरे कर्म किए उसी के हिसाब से आपको स्वर्ग या नरक की प्राप्ती होगी ये तो आप जानते ही होंगे।
शवयात्रा पर फूल फेंकने का क्या मतलब?
जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यू होती है। तो आपने देखा होगा की सम्मान पूवर्क सभी लोग उस मृत आत्मा के पैर छूते है। पैर छूकर सम्मान व्यक्त करते है। और उस पर फूल-माला भी चढ़ाते है। अक्सर उसी व्यक्ति की फोटो पर माला चढ़ाई जाती है जो भूतपूर्व हो मतलब उसने दुनिया को अलविदा कह दिया हो। कहते है कि मृत्यू के बाद व्यक्ति की आत्मा उस परमात्मा में विलिन हो जाती है जिसने हमे और आपको जन्म दिया है। अब जब शवयात्रा निकलती है तो फूल फेंकर श्रृद्धांजलि अर्पित की जाती है जिसका सीधा मतलब सम्मान व्यक्त करने से है।
मखाने फेंकने का क्या मतलब?
अब आप सोच रहे होंगें की शवयात्रा पर मखाने फेंकने का क्या मतलब है क्योंकि मखाने का सम्मान से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। लेकिन मरा हुआ व्यक्ति भी आपको कुछ सिख देकर जाए इसलिए ऐसा किया जाता है। आपने सुना होगा की जब रावण को भगवान राम ने मार गिराया तो उन्होंने लक्ष्मण को रावण के पास भेजा और कहा की जाओं रावण ज्ञानी व्यक्ति है उससे कुछ शिक्षा ले लो। तब रावण ने लक्ष्मण को शिक्षा दी थी जिस अहंकार के कारण रावण मारा गया उसी अहंकार को खत्म करने के लिए मखाने फेंके जाते है। जिस तरह से मखाना बाहर से फूला हुआ होता है और दबाव डालने पर सिकुड जाता है। ठीक उसी तरह व्यक्ति जब जिंदा होता है तो बाहर से काफी अकडू किस्म का होता है। लेकिन मरने के बाद वो एक लाश बनकर रह जाता है। इससे ये बताने की कोशिश की जाती है। की जीवन में कभी घमंड न करें।
सिक्के फेंकने का क्या मतलब?
अभी के जमाने के हिसाब से बात करे तो हर कोई पैसे के पीछे भाग रहा है। जो जितना कमा रहा है, उसे उतना ही और कमाने की लालसा है। ऐसा लगता है कि मानो धन दौलत से किसी की संतुष्टि होने वाली ही नहीं और आज तक जितने भी राजा महाराजा या धनी व्यक्ति हुए है कोई भी इससे संतुष्ट नहीं रहा। ऐसे में आम इंसान रोज की तरह किसी भी तरह जी रहा है। वो भला कैसे संतुष्ट हो सकता है। इसलिए सिक्का फेंकर ये बताने की कोशिश की जाती है। जो इंसान जिंदगी भर उसके पीछे भागता रहा है वह मरने के बाद अपने आसपास सैंकड़ों सिक्के होते हुए भी उसे उठा नहीं सकता। क्योंकि जबतक शरीर में प्राण है तभी तक आप कुछ भी कर सकते है। इसलिए धर्म शास्त्रों में ये सिख दी गई है कि व्यक्ति को जीवन में पैसे के पीछे भागने की वजाए अच्छे कर्म करने चाहिए।
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