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फिल्म नायक की तरह वेश बदलकर किसानों के बीच पहुंचा था मध्यप्रदेश सरकार का यह मंत्री

फिल्म नायक की तरह वेश बदलकर किसानों के बीच पहुंचा था मध्यप्रदेश सरकार का यह मंत्री When Revenue Minister Laxminarayan Singh reached among the farmers in the guise of a farmer vkj

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deepak
फिल्म नायक की तरह वेश बदलकर किसानों के बीच पहुंचा था मध्यप्रदेश सरकार का यह मंत्री

आपने बॉलीवुड की सबसे चर्चित फिल्म नायक तो आपने देखी होगी। फिल्म में अभिनेता अनिल कपूर ने पत्रकार की भूमिका निभाई थी। फिल्म में अनिल कपूर एक दिन के मुख्यमंत्री भी बने थे। फिल्म में अनिल कपूर कभी किसान तो कभी ट्रक ड्रायवर बनकर जनता की समस्याएं जान लेते थें। ठीक ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़ा है। जिसके बारे में शायद ही कम लोग जानते है। मामला साल 1967 का है जब संविद सरकार थी।

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संविद सरकार का मतलब संयुक्त विधायक दल की सरकार। संविद एक तरह से राजनीतिक दल था। जिसका गठन कई राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव के बाद किया गया था। 1967 में इस राजनैतिक दल को सफलता मिली थी। उस समय कई राज्यों में संविद ने कांग्रेस को हराकर अपनी सरकार बनाई थी। वही केन्द्र में कांग्रेस मामूली बहुमत से सरकार बना पाई थी। मध्यप्रदेश में भी संविद सरकार का गठन हुआ था और गोविंद नारायण सिंह मुख्यमंत्री चुने गए थें। गोविंद नारायण सिंह ध्रुवनारायण सिंह के पिताजी थें। गोविंद सिंह की सरकार में एक मंत्री थें लक्ष्मी नारायण शर्मा जो बैरसिया से विधायक थे।

किसान के वेश में निकले लक्ष्मीनारायण सिंह

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक दीपक तिवारी की पुस्तक राजनीतिनामा के अनुसार गोविंद सिंह की सरकार में राजस्व मंत्री लक्ष्मीनारायण शर्मा एक दिन जनता की समस्याओं को जानने और उनकी जमीनी हकीकत को नजदीक से पहचानने के लिए किसान के वेश में निकल गए। लक्ष्मीनारायण शर्मा ने अपने सिर पर साफा बांधा, घुटने तक धोती डालकर आष्टा तहसील पहुंच गए। जैसे ही वह आष्टा पहुंचे तो उन्हें कुछ किसान मिल गए। शर्मा ने किसानों की समस्याएं सुनी और तहसीलदार के केबिन में पहुंच गए। शर्मा ने जब तहसीलदार से सवाल जबाव किया तो तहसीलदार भड़क उठे और मंत्री लक्ष्मीनारायण शर्मा से बोला कि आखिर तुम्हें क्या तकलीफ है? कौन हो तुम?

तहसीलदार के तेवर ढीले

तहसीलदार के इस रवैये को देखकर मंत्री जी ने कहा... लक्ष्मीनारायण शर्मा, रेवेन्यू मिनिस्टर का नाम सुना है? फिर क्या था, तहसीलदार हक्का बक्का रह गए और उनके तेवर ढीले पड़ गए। इसके बाद किसानों का काम फटाफट हो गया। मंत्रीजी के इस दौरे की खबर पूरे प्रदेशभर में फैल गई। बताया जाता है कि उस दौर में मंत्री जी के दौरे के अगले 6 महीने बाद पूरे प्रदेश में किसानों के करीब छह लाख से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया था।

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