Exit Poll 2022 : क्या होते हैं एग्जिट पोल, क्या सही होते है आंकड़े, जानिए कैसे करते है काम!

Exit Poll 2022 : देश के पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव का आज अंतिम दिन है। आज 07 मार्च को मतदान के बाद रात 8 बजे से एक्जिट पोल आने शुरू हो जाएंगे। लेकिन क्या एक्जिट पोल सटीक होते है, कितने सही होते है। यह जानना बेहद ही जरूरी है। हालांकि एक्जिट पोल के नजीते असल नजीते तो नहीं होते है। एक्जिट पोल वोट डालने वालों के रूझानों के आधार तैयार किए जाते है। वोट डालने वालों के रूझानों से अंजादा लगाया जाता है कि परिणाम किस तरफ जा सकते है। कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है और कौन किस नम्बर पर आ सकता है। हालांकि एक्जिट पोलों पर हमेशा खरा नहीं उतरा जा सकता है।

हालांकि चुनाव आयोग ने नियम बनाया है कि आखिरी चरण की वोटिंग से पहले एग्जिट पोल जारी नहीं किए जा सकते है। आज 07 मार्च को आखिरी और सातवां चरण है। अंतिम चरण के खत्म होने के बाद चुनाव आयोग अधिकारिक तौर पर बताएगा की सातवें चरण में कितना मतदान हुआ है। इसी के बाद सोशल साईट्स, न्यूज चौनल, एग्जिट पोल एजेंसियां पोल जारी करने लगती है। हालांकि एग्जिट पोल कितने सटीक होते है, उनकी सटीकता पर कई बार सवाल उठते आए है।

एग्जिट पोल्स क्या होते हैं?

दरअसल, एग्जिट पोल पोलिंग बूथ से वोट करने के बाद बाहर आने वाले मतदाता से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते है। मतदाता के रूझानों के आधार पर ही तय किया जाता है कि किस राजनैतिक दल का पलड़ा भारी होता है। एग्जिट पोल तैयार करने वाली संस्थान, एजेंसियां या फिर न्यूज चौनल बड़े पैमाने पर वोटरों से बातचीत करती है। इसके बाद कलेक्ट किए गए डेटा का ऐनालिसिस किया जाता है। इसके बाद ही एग्जिट पोल तैयार किए जाते है।

बीच चुनाव में क्यो नहीं आते एग्जिट पोल?

चुनाव आयोग के जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के तहत मतदान के दौरान कोई ऐसी जानकारी, पोस्ट जो मतदाता को भ्रमित करे, वोटरों के मनोविज्ञान पर असर डाले या फिर मतदाता को अपना वोट बदलने के लिए प्रेरित करें, ऐसे कंटेंट को चुनाव की वोटिंग से बीच नही डाला जा सकता है। ऐसे कंटेंट को डालने के लिए वोटिंग खत्म होने के डेढ़ घंटे के बाद ही प्रसारित किया जा सकता है।

क्या सही होते है एग्जिट पोल्स?

एग्जिट पोल को लेकर लोगों के मन में एक सवाल सबसे ज्यादा खटकता है कि क्या जारी किया गए एग्जिट पोल सही होते है। तो आपकों बता दें कि ऐसा कुछ नहीं है। एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। क्येांकि एग्जिट पोल्स अनुमान के आधार पर होते है। यह भी बता दें कि भारत में एग्जिट पोल का इतिहास सटीक नहीं रहा है। कई बार तो एग्जिट पोल नतीजों के विपरीत आएं है। इसलिए एग्जिट पोल हमेशा खरा नहीं उतरता है।

कब शुरू हुआ एग्जिट पोल

माना जाता है कि एग्जिट पोल की शुरूआत 1967 में हुई थी। डच समाजशास्त्री और पूर्व राजनीतिज्ञ मार्सेल वान डेन ने भारत में चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल दिए थे। हालांकि इसी साल अमेरिका में भी एक बार एक राज्य के चुनावों के दौरान एग्जिट पोल जारी किया गया था। वैसे एग्जिट पोल्स अनुमान साल 1940 से लगाए जाने लगे थे।

आपको बता दें कि गोवा, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा के लिए वोट डाले गए हैं। जिनमें उत्तर प्रदेश में 07 चरणों में मतदान हुआ है। गोवा, पंजाब और उत्तराखंड में 14 फरवरी को वोटिंग हुई तो मणिपुर में 27 फरवरी और 03 मार्च को। यूपी में आज यानी 07 मार्च को अंमित चरण का मतदान हुआ। इन पांचों राज्यों में हुए चुनाव के परिणाम 10 मार्च की सुबह आंएगें। अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ राज्यों के परिणाम उसी दिन आ जाएंगे लेकिन कुछ राज्य के पूरे परिणाम अगले दिन तक आ सकते है।

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