"28 जनवरी 1865 यह वो तारीख है जिसने भारत को एक ऐसी आवाज़ दी, जिससे ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिल गई। आज पूरा देश महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय जी को उनकी जयंती पर नमन कर रहा है। पंजाब के मोंगा जिले में जन्मे लाला जी को दुनिया 'पंजाब केसरी' और 'शेर-ए-पंजाब' के नाम से जानती है। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उस 'लाल-बाल-पाल' त्रयी का हिस्सा थे, जिसने पहली बार अंग्रेजों की आंखों में आंखें डालकर 'स्वराज' की मांग की थी। लाला जी सिर्फ एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी नायक थे। उन्होंने समझा कि आजादी सिर्फ नारों से नहीं, आर्थिक मजबूती से आएगी। इसी स्वदेशी सोच के साथ उन्होंने देश के पहले स्वदेशी बैंक—'पंजाब नेशनल बैंक' की स्थापना कर आर्थिक स्वतंत्रता की नींव रखी। साइमन कमीशन का विरोध करते हुए उन पर हुआ लाठीचार्ज उनके अंत का कारण तो बना, लेकिन उनके आखिरी शब्द—'मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी'—आज भी हर भारतीय के खून में देशभक्ति का संचार करते हैं। 1556 : मुगल शासक हुमायूँ की मौत हो गई थी 1813 : युनाइटेड किंगडम में पहली बार 'प्राइड एंड प्रेजुडिस' किताब का प्रकाशन हुआ 1926: हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार विद्यानिवास मिश्र का जन्म हुआ था 1961 : एचएमटी घड़ियों की पहली फैक्ट्री की आधारशिला बेंगलुरु में रखी गयी 2004: भारत की प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर शेफाली वर्मा का जन्म हुआ था
ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की आखिरी कील बनने वाले महानायक की गाथा
28 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की जयंती मनाई जाती है। 'पंजाब केसरी' ने स्वदेशी बैंक की स्थापना की और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया। आज इसी दिन अन्य ऐतिहासिक घटनाएं भी जुड़ी हैं।
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