Advertisment

यहां श्मशान में जलती चिताओं के सामने नाचती हैं महिलाएं? जानिए क्यों

यहां श्मशान में जलती चिताओं के सामने नाचती हैं महिलाएं? जानिए क्यों varanasi women dance in front of pyres at manikarnika ghat kashi vkj

author-image
deepak
यहां श्मशान में जलती चिताओं के सामने नाचती हैं महिलाएं? जानिए क्यों

मानव जीवन में मृत्यू यर्थात सत्य है। इंसान की मृत्यू के बाद उसे श्मशान में संसार से मुक्ति दी जाती है। लेकिन क्या आपकों पता है कि एक ऐसा भी श्माशान है जहां चिताओं के सामने महिला डांस करती है। यह प्रथा करीब 350 सालों से चली आ रह है। लेकिन श्मशान में चिताओं के सामने महिलाएं क्यों नाचती है। हालांकि लोग इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे क्योंकि जहां का माहौल गमगीन हो वहां महिलाएं नाचकर जश्न कैसे मना सकती है लेकिन यह सच है।

Advertisment

दरअसल, हम बात कर रहे है उत्तरप्रदेश के वाराणसी के महाश्मशान के नाम से जाना जाने वाले मणिकर्णिका घाट की। बताया जाता है कि इस श्मशान में बीते करीब 350 सालों से श्मशान में चिताओं के सामने महिलाओं के नाचने की प्रथा रही है। श्मशान में महिलाएं चौत्र नवरात्र की सप्ती तिथि पर मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं के साथ नाचती है। इसके बाद महिलाएं बाबा मसाननाथ के मंदिर में हाजिरी लगाती है।

श्मशान में लगाया जाता है म्यूजिक सिस्टम

खबरों के अनुसार बाबा मसाननाथ के 3 दिवसीय वार्षिक श्रंगार के आखिरी दिन महिलाएं चिताओं के सामने नाचती है। इस अवसर पर आसपास के जिलों से महिलाएं शामिल होती है। हैरानी की बात यह है कि इस दिन श्मशान में श्वों के आने का सिलसिला लगा रहता है। इतना ही नहीं श्मशान में बकायदा म्यूजिक सिस्टम लगाया जाता है। जिसकी धुन पर नर्तिकाएं थिरकती हैं।

क्या है मान्यता

श्मशान में चिताओं के सामने महिलाओं के नाचने को लेकर एक प्रथा है। मान्यता है कि जलते शवों के सामने नृत्य करने से इन महिलाओं को इस नारकीय जीवन से छुटकारा मिल जाता है और उनका अगला जन्म सुधर जाता है। नाचने वाली महिलाओं का मनना है कि वे बाबा मसाननाथ से डांस करते हुए जब प्रार्थना करती है तो उन्हें सच में इस नरक से मुक्ति मिल जाती है और उनका अगला जन्म संवर जाता है। इस प्रथा की शुरूआत 17वीं शताब्दी से शुरू होना बताया जाता है। श्मशान के पास बने मसाननाथ का मंदिर काशी के राजा मानसिंह ने बनवाया था। बताया जाता है कि राजा मानसिंह का कहना था कि मंदिर में संगीत का कार्यक्रम हो। लेकिन चिताओं के सामने कोई नृत्य करने को तैयार नहीं था। लेकिन नगरवधुएं ही नाचने को तैयार हुई। उसी दिन से लेकर आज तक श्मशान में जलती चिताओं के सामने नाचने की यह परंपरा चली आ रही है।

Advertisment
Advertisment
चैनल से जुड़ें