Advertisment

Magh Mela: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला, बोेले- ‘दिल में दुख हो तो संगम भी शांति नहीं देता’

Magh Mela: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 11 दिनों से माघ मेले में धरने पर बैठे हुए थे। आज उन्होंने मेला छोड़ दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं।

author-image
Satya Sharma
magh mela

Magh Mela: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 11 दिनों से माघ मेले में धरने पर बैठे हुए थे। आज उन्होंने मेला छोड़ दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। इस दुख की भरपाई पता नहीं कौन सा नेता आएगा कौन सी पार्टी आएगी जो करेगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।

Advertisment

फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मेला छोड़ने का ऐलान किया। इसके थोड़ी देर बाद उन्होंने मेला छोड़ भी दिया। 

11 दिन धरने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया। इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता। शंकराचार्य ने कहा- इस घटना ने मेरी आत्मा को झकझोर दिया। इससे न्याय और मानवता के प्रति मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। मैंने कुछ समय का मौन रखकर प्रार्थना भी की कि जिन लोगों ने अपमान किया है, उन्हें दंड मिले। मेरे सम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास हुआ। इसके पीछे राज्य सरकार जिम्मेदार है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सुबह 8 बजे वैनिटी वैन से निकले। इसके बाद शिविर के बाहर पूजा-पाठ किया।

बता दें कि माघ मेला 15 फरवरी तक चलेगा। अभी 2 स्नान बचे हैं। माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी)। यानी विवाद के कारण शंकराचार्य ने माघ मेला 18 दिन पहले ही छोड़ दिया। मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य का प्रशासन से विवाद हुआ, फिर वे बिना स्नान किए लौट गए। इसके बाद उन्होंने बसंत पंचमी के दिन भी स्नान नहीं किया था। अब वे बाकी दोनों स्नान में भी शामिल नहीं होंगे।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्यों छोड़ा माघ मेला

बता दें कि 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया। प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।

Advertisment

वहीं, शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।

ये भी पढ़ें:Alankar Agnihotri Controversy: बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को किया हाउस अरेस्ट, देर रात अज्ञात जगह ले जाने की आशंका

UP prayagraj avimukteshwaranand Magh mela Sangam Avimukteshwaranand interview controversy Avimukteshwaranand notice Avimuktareshwarnand Press Conference swami Avimukteshwaranand controversy protest Magh Mela 2026
Advertisment
चैनल से जुड़ें