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Kanpur Kinnar Shobha Yatra: कानपुर की सड़कों पर मंगलवार को एक अनोखी और भव्य शोभायात्रा निकली, जिसमें अखिल भारतीय किन्नर महासभा के बैनर तले देशभर से आए हजारों मंगलामुखी किन्नर समाज के सदस्यों ने भाग लिया। यह आयोजन कानपुर के दक्षिण नौबस्त अर्रा रोड के शकुंतला लॉन में चल रहे किन्नर महासम्मेलन का हिस्सा था, जो पिछले कई दिनों से जारी है। सम्मेलन में शामिल होने के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम सहित विभिन्न राज्यों से लगभग 15 हजार से अधिक किन्नर कानपुर पहुंचे थे।
कार, रथ और बग्गी से निकली शाही सवारी
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शोभायात्रा की शुरुआत वैष्णो देवी मंदिर (कर्रही) के दर्शन से हुई। इसके बाद हजारों किन्नरों ने पारंपरिक और आधुनिक अंदाज में सजे-धजे होकर सड़कों पर निकलना शुरू किया। यात्रा में विंटेज कारें, शाही बग्घियां, रथ, घोड़े और राजस्थानी ऊंट भी शामिल थे, जो इस आयोजन को और भी आकर्षक बना रहे थे। सबसे आगे विंटेज कार में कार्यक्रम की आयोजिका काजल किरण के साथ विशेष कलश धारण किए किन्नर सवार थे। यह कलश किन्नर समाज की प्राचीन परंपराओं का प्रतीक था, जिसके माध्यम से समाज ने लोगों की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
शोभा यात्रा में बेहद उत्साहित किन्नर समाज
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यात्रा में पीछे 11 विशेष शाही बग्घियां चल रही थीं, जिन पर बड़ी संख्या में किन्नर सवार थे। इन बग्घियों के अलावा घोड़ों और ऊंटों पर सजे-धजे किन्नर झूमते नाचते नजर आए। कई किन्नरों ने फैंसी ड्रेस, चमकदार जेवर, भव्य परिधान और पारंपरिक आभूषण पहने थे, जो दूर से ही लोगों का ध्यान खींच रहे थे। एक विंटेज कार पर हाथ में तलवार लिए किन्नरों का उत्साह देखते ही बनता था, जबकि घोड़ों पर सवार किन्नर लोगों को हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे थे।
समर्पण और एकता का संदेश
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करीब 11 किलोमीटर लंबी यह शोभायात्रा कानपुर की प्रमुख सड़कों से गुजरी। रास्ते में ट्रैफिक थम-सा गया और सड़कों के दोनों किनारों पर देखने वालों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग इस अनोखे नजारे को कैमरे में कैद करने में व्यस्त थे। यात्रा के दौरान भक्ति गीतों के साथ-साथ देशभक्ति धुनें भी बज रही थीं, जिन पर किन्नर समाज के सदस्य जमकर झूमे और नाचे। इससे यात्रा में एक तरफ आस्था और भक्ति का माहौल था, तो दूसरी तरफ देश के प्रति समर्पण और एकता का संदेश भी मिल रहा था।
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कुलदेवी की विशेष पूजा-अर्चना
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शोभायात्रा शकुंतला लॉन लौटने के बाद कुलदेवी की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। आयोजकों ने बताया कि इस पूजा में समाज की सुख-शांति, तरक्की और एकजुटता के लिए प्रार्थना की जाती है। यह आयोजन न केवल किन्नर समाज की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करता है, बल्कि समाज में उनकी गरिमा, एकता और योगदान को भी रेखांकित करता है।
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