कानपुर फर्जी डिग्री रैकेट: बीटेक-LLB डिग्री पर 40% कमीशन, 60% क्लर्क-कर्मचारियों में बंटता, SIT 14 यूनिवर्सिटियों में करेगी जांच

(रिपोर्ट - अनुराग श्रीवास्तव) कानपुर में बिना परीक्षा डिग्री दिलाने वाले रैकेट पर पुलिस का शिकंजा कस गया है। 14 सदस्यीय एसआईटी गठित कर 9 राज्यों की 14 यूनिवर्सिटियों के क्लर्क और कर्मचारियों से पूछताछ होगी। सफेदपोश लोगों के नाम उजागर होने की उम्मीद है।

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Kanpur Fake Degree Scam: उत्तर प्रदेश में बिना परीक्षा दिए डिग्री और मार्कशीट दिलाने वाले गिरोह के खुलासे के बाद अब कानपुर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए 14 सदस्यीय SIT टीम का गठन किया है। ये SIT टीम 9 राज्यों की 14 यूनिवर्सिटी के क्लर्क और कर्मचारियों से पूछताछ करेगी। इसी के साथ ही सफेदपोश लोगों का नाम सामने आ सकते हैं। 

नेक्सस के भंडाफोड़ के लिए SIT टीम गठित

कानपुर में बिना परीक्षा दिए मार्कशीट और डिग्रियां दिलाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के दो दिन बाद अब पुलिस ने पूरे नेक्सस को खत्म करने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस आयुक्त कानपुर नगर के निर्देश पर 14 सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है। यह टीम अब उन सफेदपोश लोगों की पहचान करेगी जो पर्दे के पीछे से इस शिक्षा माफिया को चला रहे थे। Kanpur fake degree racket 

पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी 

गौरतलब है कि दो दिन पूर्व पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड मैथ टीचर शैलेंद्र को गिरफ्तार कर उससे बंद कमरे में पूछताछ की थी। शैलेंद्र ने एडमिशन एजेंट के तौर पर शुरुआत की थी, लेकिन धीरे-धीरे उसने 9 राज्यों की 14 यूनिवर्सिटियों में अपना नेटवर्क फैला लिया। 

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फेक डिग्री दे कमीशन में हिस्सेबाजी 

सहायक पुलिस आयुक्त विपिन ताड़ा ने मीडिया को बताया कि पूछताछ में जो कुछ सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था। यह सिंडिकेट बीटेक, बी.फार्मा और एलएलबी जैसी डिग्रियां दिलाने के लिए सिर्फ 40% कमीशन पर काम करता था, जबकि 60% हिस्सा विश्वविद्यालयों के क्लर्क और कर्मचारियों को जाता था। पिछली छापेमारी में पुलिस को 900 से अधिक फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद हुई थीं। 

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क्लर्क और कर्मचारियों से होगी पूछताछ

अब गठित एसआईटी टीम एडिशनल डीसीपी कानपुर दक्षिण के नेतृत्व में इन 14 यूनिवर्सिटियों के क्लर्क और कर्मचारियों से गहन पूछताछ करेगी। पुलिस की प्राथमिकता यह रहेगी कि शिक्षा माफिया के रूप में काम करने वाले उन सभी लोगों के नाम सामने आएं जो इस पूरे नेक्सस को संचालित कर रहे थे। साथ ही, यह भी खंगाला जाएगा कि गिरोह ग्राहकों से किस तरह संपर्क करता था और उनके काम करने का तरीका क्या था। 

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