कानपुर में रिटायर्ड इंजीनियर के साथ ठगी: 70 दिन तक डिजिटल अरेस्ट, 53 लाख ठगे, CBI अफसर बनकर दी जान से मारने की धमकी

कॉलर ने खुद को गौरव बताते हुए कहा कि रमेश चंद्र के नाम से जारी सिम से महाराष्ट्र की एक 19 वर्षीय लड़की को परेशान किया गया, जिसने आत्महत्या कर ली है।

Kanpur Cyber Digital Arrest:

Kanpur Cyber Digital Arrest:

Kanpur Cyber Digital Arrest: कानपुर के रानीघाट थाना क्षेत्र स्थित कोहना उपवन सोसाइटी निवासी रिटायर्ड इंजीनियर रमेश चंद्र साइबर ठगी का शिकार हो गए। वह केस्को से सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हैं। 3 अक्टूबर को वह अपनी पत्नी नीलम का डायलिसिस कराने लाजपत नगर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल गए थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक कॉल आई, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। Kanpur Cyber Fraud 

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मुंबई पुलिस बनकर डराने लगा ठग

कॉलर ने खुद को गौरव बताते हुए कहा कि रमेश चंद्र के नाम से जारी सिम से महाराष्ट्र की एक 19 वर्षीय लड़की को परेशान किया गया, जिसने आत्महत्या कर ली है। कॉलर ने खुद को कोलाबा पुलिस स्टेशन, मुंबई का कर्मचारी बताया और केस दर्ज होने की बात कहकर फोन काट दिया। कुछ ही देर बाद दूसरे नंबर से वीडियो कॉल आई, जिसमें खुद को पुलिस अधिकारी बताया गया।

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मनी लॉन्ड्रिंग केस और CBI का डर

इसके बाद एक अन्य कॉल में खुद को CBI अफसर बताने वाले व्यक्ति ने रमेश चंद्र को बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है। ठगों ने दावा किया कि इस केस में जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल का नाम भी जुड़ा है। उन्हें जेल भेजने, पत्नी और बच्चों को नजरबंद करने और संपत्ति सीज करने की धमकी दी गई। Retired Engineer Scam

70 दिन का डिजिटल अरेस्ट

डर और मानसिक दबाव में आकर रमेश चंद्र पूरी तरह ठगों के नियंत्रण में आ गए। घर लौटने के बाद उन्हें एक कमरे में रहने को मजबूर किया गया। ठगों ने साफ कहा कि अगर वह बाहर निकले, किसी से बात की या पुलिस से संपर्क किया तो जान से मार दिया जाएगा। यहां तक कि समय से खाना खाने तक पर रोक लगा दी गई।

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53 लाख रुपये ट्रांसफर कराए

4 अक्टूबर से ठगों ने पैसों की मांग शुरू कर दी। पीड़ित से पीपीएफ, बैंक खातों, शेयर और म्यूचुअल फंड की पूरी जानकारी ली गई। अलग-अलग खातों में कुल 53 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। ठग कहते रहे कि यह रकम जांच के बाद वापस मिल जाएगी।

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ठगी का एहसास और शिकायत

करीब 70 दिन बाद रमेश चंद्र को ठगी का एहसास हुआ। तब तक उनके खाते में केवल 11 हजार रुपये ही बचे थे। 15 दिसंबर को उन्होंने थाने में जाकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब इस साइबर ठगी की जांच में जुटी है।

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साइबर ठगी से सतर्क रहने की जरूरत

यह मामला साफ करता है कि साइबर ठग किस तरह डर और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को डिजिटल अरेस्ट में लेकर लाखों रुपये ठग रहे हैं। पुलिस बार-बार चेतावनी दे रही है कि कोई भी एजेंसी फोन पर इस तरह की कार्रवाई नहीं करती।

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