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Bareilly City Magistrate Resignation: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्रा के इस्तीफे का कारण केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां बताई जा रही है।
साथ ही अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नियमों, प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्यों के साथ हुआ मारपीट की घटना और उससे जुड़े प्रशासनिक दबावों का हवाला दिया है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
"पद और प्रतिष्ठा से ऊपर स्वधर्म और स्वाभिमान: मेरा इस्तीफा"
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आज भारी मन से नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प के साथ मैं, अलंकार अग्निहोत्री (सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली), अपने पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। यह निर्णय व्यक्तिगत लाभ या हानि का नहीं, बल्कि समाज के प्रति मेरी जवाबदेही और अंतरात्मा की आवाज है। UGC Regulations 2026 protest
इस्तीफे के मुख्य कारण जो हर नागरिक को जानने चाहिए:
1. पूज्य संतों का अपमान और ब्राह्मणों का उत्पीड़न
प्रयागराज माघ मेले की पावन धरती पर जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के बटुक शिष्यों की चोटी (शिखा) पकड़कर प्रशासन द्वारा बेरहमी से पिटाई की गई। जिस समाज में संतों की शिखा को छुआ नहीं जाता, वहां उन्हें घसीटा गया। क्या यह प्रशासन अब ब्राह्मणों के नरसंहार की मूक सहमति दे रहा है? प्रदेश में पिछले छह महीनों से ब्राह्मणों के घरों पर बुलडोजर चलना और जेलों में उनकी संदिग्ध हत्याएं होना अब एक भयावह पैटर्न बन चुका है।
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2. UGC Regulations 2026 - युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
13 जनवरी 2026 को लागू हुआ यह काला कानून सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है। इसमें सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को पहले से ही 'दोषी' मान लिया गया है। 'समता समितियों' के नाम पर हमारे बेटे-बेटियों का मानसिक और शारीरिक शोषण करने का रास्ता खोल दिया गया है। क्या हम अपने बच्चों को शिक्षा संस्थानों में पढ़ने भेज रहे हैं या प्रताड़ित होने के लिए? Alankar Agnihotri resignation
3. प्रशासन की चापलूसी और दोहरा चरित्र
आज का प्रशासन तंत्र 'सिस्टम' नहीं बल्कि 'चापलूसी' का अड्डा बन गया है। एक तरफ हमारे असली आराध्यों और शंकराचार्यों का अपमान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला स्तर के बड़े अधिकारी कुछ कथित संतों के साथ बैठकर रोटियां सेंक रहे हैं और फोटो खिंचवा रहे हैं। क्या जिलाधिकारी का काम अब केवल सत्ता के करीबियों की खातिरदारी करना रह गया है?
4. जनप्रतिनिधियों की रीढ़हीनता
मैं उन ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से पूछना चाहता हूं—क्या आपकी रीढ़ अभी बची है? आप कॉर्पोरेट कंपनी के एम्प्लॉई की तरह 'हाई कमांड' के आदेश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि आपके समाज की बहू-बेटियों का भविष्य और संतों का सम्मान दांव पर है। क्या आप तब बोलेंगे जब सड़कों पर
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