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Etawah Scorpion Holi: इटावा के इस गांव में बिच्छुओं के साथ खेली जाती है होली, डंक नहीं मारते... शुभकामना देने आते हैं

रिपोर्ट- रामकुमार राजपूत इटावा के संथाना गांव में होली का अनोखा त्योहार मनाया जाता है। यहां लोग गुलाल नहीं बल्कि बिच्छुओं के साथ होली खेलते हैं। सालों पुरानी परंपरा के अनुसार ये बिच्छू किसी को डंक नहीं मारते और शुभकामनाएं देने आते हैं।

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Shaurya Verma
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Etawah Scorpion Holi: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ताखा क्षेत्र स्थित संथाना गांव में होली का रंग कुछ अलग ही दिखाई देता है। यहां लोग गुलाल या रंगो से नहीं, बल्कि बिच्छुओं के साथ एक अनोखी परंपरा निभाते हैं, जिसे लेकर पूरे इलाके में कौतहूल बना रहता है। 

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रंगों की जगह बिच्छुओं के साथ खेली जाती है होली 

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उत्तर प्रदेश में होली की कई अनोखी परंपराएं हैं, जैसे फूलों की होली, लट्ठमार होली या मसान होली, लेकिन इटावा के इस गांव में होली का रूप बिल्कुल अलग है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां होली के दिन एक-दूसरे पर रंग या गुलाल नहींस बल्कि बिच्छू फेंके जाते है। हैरानी की बात ये है कि इसके बावजूद किसी को डंक नहीं लगता है। Itawa Holi Tradition 

सालभर नहीं दिखते बिच्छू, होली पर निकलते हैं बाहर

ग्रामीणों का कहना है कि आम दिनों में गांव में एक भी बिच्छू नजर नहीं आता है, लेकिन जैसे ही होली का दिन आता है और फाग की थाप पर लोग नाच-गाने में जुटते हैं, गांव के बाहर स्थित भैंसान टीने पर लाखों की संख्या में बिच्छू अपने बिलों से बाहर निकलने लगते हैं। ये नजारा देखने के लिए आसपास के लोग भी इकट्ठा होतें हैं। Unique Holi Celebration

डंक नहीं मारते, शुभकामना देने आते हैं 

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सालभर नहीं दिखते बिच्छू, होली पर निकलते हैं बाहर

स्थानीय मान्यता के अनुसार ये बिच्छू स्वाभाव से जहरीले होते है लेकिन होली के दिन इनका व्यवहाग बदल जाता है। ग्रामीण दावा करते है कि जब लोग उन्हें  हाथ में लेकर एक-दूसरे पर फेंकते हैं, तब भी वे किसी को डंक नहीं मारते। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि ये बिच्छू होली की शुभकामनाएं देने आते हैं। Santhan Village Scorpion Holi

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सदियों पुरानी बताई जाती है परंपरा

संथाना गांव में बिच्छुओं के साथ होली खेलने की यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी बताई जाती है। ग्रामीण इसे अपनी आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि आज तक इस परंपरा के दौरान किसी के घायल होने या अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई।

इटावा के इस अनोखे उत्सव ने होली के पारंपरिक रंगों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली है, जिसे देखने और समझने के लिए हर साल लोग उत्सुक रहते हैं। 

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