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Pension Scheme: केंद्र सरकार के पेंशन योजना को लेकर बढ़ी नाराजगी; UPS से खुश नहीं कर्मचारी, OPS को लेकर तेज हुई मांग

UPS Pension Scheme: UPS को केंद्रीय कर्मचारियों ने ठुकराया, OPS की बहाली को लेकर फिर तेज हुई मांग। 30 जून तक का समय, फिर भी UPS को नहीं मिल रहा समर्थन।

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Shashank Kumar
UPS Pension Scheme

UPS Pension Scheme

UPS Pension Scheme: केंद्र सरकार के 30 लाख से अधिक कर्मचारियों के बीच पेंशन को लेकर एक बार फिर असंतोष की लहर दौड़ गई है। सरकार द्वारा मौजूदा नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में शामिल होने का विकल्प दिया गया है, लेकिन इस पर कर्मचारी संगठन खासे नाखुश नजर आ रहे हैं। सरकार ने UPS में शामिल होने के लिए 30 जून 2025 तक की समयसीमा तय की है, पर अब तक इसमें अपेक्षित भागीदारी नहीं दिख रही है।

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UPS के बजाय पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की उठने लगी मांग

हाल के महीनों में कर्मचारी संगठनों ने UPS को खारिज करते हुए एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग तेज कर दी है। संगठनों का मानना है कि UPS और NPS दोनों ही स्कीमें कर्मचारियों के लिए आर्थिक रूप से असुरक्षित हैं। OPS के तहत रिटायरमेंट के बाद सुनिश्चित पेंशन मिलती थी, जबकि NPS और UPS में यह लाभ बाजार और गणनाओं पर आधारित होता है।

क्या है NPS और UPS में फर्क, और क्यों नहीं मिल रहा UPS को समर्थन

NPS, यानी नेशनल पेंशन स्कीम (UPS Pension Scheme), एक ऐसी प्रणाली है जिसमें सरकार और कर्मचारी दोनों एक निर्धारित अंशदान करते हैं, जो बाद में शेयर बाजार और अन्य निवेशों में लगाया जाता है। वहीं UPS, यूनिफाइड पेंशन स्कीम, एक नया मॉडल है जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों को एक स्थिर पेंशन देने का वादा करता है लेकिन इसमें कई शर्तें जुड़ी हुई हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि UPS में पेंशन इस बात पर निर्भर करती है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी कितने साल जीवित रहता है। यदि कोई कर्मचारी UPS से जुड़ता है, तो औसतन उसे केवल 30% पेंशन मिलेगी और उसकी मृत्यु के बाद पत्नी को 18% तक ही लाभ मिल पाएगा। ऐसे में UPS, OPS जैसी सुरक्षा नहीं दे पाती।

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NPS और UPS से निराश कर्मचारी, OPS की वापसी पर अडिग

नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, UPS न तो आर्थिक रूप से भरोसेमंद है और न ही सामाजिक सुरक्षा की भावना को पूरा करता है। उनका कहना है कि 30-35 वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद यदि 16 साल तक जीवित रहने की शर्त पर ही पूरी पेंशन मिले, तो यह व्यवस्था श्रमिक हितैषी नहीं कही जा सकती।

पेंशन योजना पर बना राजनीतिक दबाव और कर्मचारी एकता का असर

अब जब कर्मचारी संगठनों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और भी गर्मा सकता है। चुनावी वर्ष में कर्मचारी वर्ग की यह मांग कई राज्यों और केंद्र सरकार के लिए एक संवेदनशील विषय बनती जा रही है। कर्मचारी वर्ग यह मांग कर रहा है कि जिस प्रकार कुछ राज्य सरकारों ने OPS को पुनः लागू किया है, उसी प्रकार केंद्र को भी यह निर्णय लेना चाहिए।

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क्या केंद्र सरकार झुकेगी OPS की ओर?

पेंशन को लेकर कर्मचारियों की यह नाराजगी सरकार के लिए एक चेतावनी है। UPS जैसी योजना (UPS Pension Scheme) को लागू करने से पहले कर्मचारियों की राय और वित्तीय सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। OPS की वापसी न केवल कर्मचारी वर्ग का भरोसा लौटाएगी, बल्कि उन्हें सेवा के बाद सम्मानजनक जीवन जीने की गारंटी भी देगी।

यह पेंशन से जुड़ा मसला सिर्फ संख्याओं का नहीं बल्कि कर्मचारियों की मेहनत और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। ऐसे में सरकार को इस दिशा में तात्कालिक और संवेदनशील निर्णय लेने की आवश्यकता है।

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