Up Election 2022 : विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश विदेश चले जाएंगे : केशव मौर्य

Up Election 2022 : विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश विदेश चले जाएंगे : केशव मौर्य

बलिया। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को दावा किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के होने वाले चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव विदेश चले जायेंगे। उप मुख्यमंत्री मौर्य ने सोमवार को जिले के सिकंदरपुर में भाजपा के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा और कानपुर-कन्‍नौज में इत्र कारोबारी के यहां छापे की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘समाजवादी इत्र की खुशबू जब से फैली है, अखिलेश यादव के चेहरे पर 12 बज गए हैं और उनके हलक से आवाज नहीं निकल रही है।’’ मौर्य ने दावा किया कि अखिलेश कटघरे में हैं, वह इस बार 47 का आंकड़ा पार नहीं कर पाएंगे और भाजपा की जीत के बाद अखिलेश विदेश चले जाएंगे।’’मौर्य ने कहा, ‘‘कारसेवकों पर गोली और कांवरियों पर लाठी बरसाने वालों को अचानक राम की याद आने लगी है, कल अखिलेश जी परशुराम जी की प्रतिमा लगाकर पूजा कर रहे थे।’’

चुनावी हिंदुओं से सावधान रहना है

उन्होंने कहा कि जो राम का नहीं हुआ वह परशुराम का क्या होगा। उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि 2014 के पहले वह कब राम लला की जन्मभूमि, बाबा विश्वनाथ की धरती और कृष्ण जन्मभूमि पर गए थे। उन्होंने कहा कि जब जनता 2014 में जागी और सपा का सूपड़ा साफ कर दिया, तब अखिलेश यादव को मंदिर और भगवान का दरबार याद आने लगे। उन्होंने कहा कि इन चुनावी हिंदुओं से सावधान रहना है। इसके साथ ही मौर्य ने कहा, ‘‘सबसे बड़ा परिवर्तन यह आया है कि सपा का प्रचार करने वाले और गुंडे लाल टोपी लगाकर जालीदार टोपी जेब मे रखने लगे हैं।’’

भाजपा को भारी जीत मिली थी

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव 2022 नहीं अब 2027 की तैयारी करें, सपा अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की 2014 में आंधी और 2019 से सुनामी चल रही है, इसके आगे सपा-बसपा व कांग्रेस पत्ते की तरह बिखर जाएंगे, उन्हें 2022 के लिए प्रयास बंद कर देना चाहिए। गौरतलब है कि 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में सिर्फ 47 सीटों पर जीत मिली थी जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 312 और उसके सहयोगियों ने 13 सीटें जीती थीं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को भारी जीत मिली थी

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