हाइलाइट्स
- महाकाल मंदिर के गर्भगृह में VIP एंट्री पर उठे सवाल।
- VIP एंट्री के खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में लगी याचिका।
- सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का अधिकार मिले।
Ujjain Mahakal Temple Garbhgrih Entry Public vs VIP Indore High Court: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों को प्रवेश से रोके जाने और नेताओं व रसूखदारों को विशेष अनुमति मिलने का मामला इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां जनहित याचिका में मंदिर प्रशासन की नीति पर सवाल उठाए गए हैं। अब कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
याचिका में सवाल उठाया गया है कि दूर-दराज से आने वाले लाखों भक्त बाहर से ही बाबा महाकाल के दर्शन करने को मजबूर हैं, जबकि नेता और वीआईपी आसानी से गर्भगृह में प्रवेश पा रहे हैं। गुरुवार को अदालत ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति, उज्जैन कलेक्टर और एसपी को पक्षकार बनाया गया हैं।
महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर उठे सवाल
देशभर से लाखों श्रद्धालु उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन आम लोगों के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगी हुई है। वहीं, राजनेता, वीआईपी और रसूखदार लोग आसानी से गर्भगृह में पहुंच रहे हैं। इस असमानता के खिलाफ दर्पण अवस्थी नामक व्यक्ति ने इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में यह अहम सवाल उठाया गया है कि जब देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों श्रद्धालु सिर्फ बाहरी हिस्से से बाबा महाकाल के दर्शन करने को मजबूर हैं, तो फिर नेताओं और वीआईपी व्यक्तियों को गर्भगृह में विशेष प्रवेश क्यों दिया जा रहा है?
कोर्ट में क्या हुआ?
हाईकोर्ट की युगलपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें राज्य सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट, उज्जैन कलेक्टर और एसपी को पक्षकार बनाया गया है। वकील चर्चित शास्त्री ने कोर्ट के सामने दलील दी कि VIP कल्चर के चलते आम भक्तों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
मंदिर समिति ने RTI का नहीं दिया जवाब
दरअसल, इंदौर से बीजेपी इंदौर विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष द्वारा जबरन महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने की घटना के बाद, याचिकाकर्ता ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में दर्शन की अनुमति दिलाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की।
याचिकाकर्ता के वकील चर्चित शास्त्री ने बताया कि उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत महाकाल मंदिर समिति से यह जानकारी मांगी कि नेताओं, अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को गर्भगृह में प्रवेश किस आदेश या नियम के तहत दिया जाता है। हालांकि, मंदिर समिति ने इस संबंध में कोई भी जवाब नहीं दिया।
वकील ने आरोप लगाया कि जहां आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है, वहीं राजनेता, उनके परिजन, वीआईपी आसानी से विशेष अनुमति प्राप्त कर अंदर पहुंच जाते हैं। यह व्यवस्था पूर्णतः भेदभावपूर्ण और असमान है।
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क्या मांग की गई है याचिका में?
- महाकाल मंदिर के गर्भगृह में VIP के नाम पर विशेष अनुमति बंद की जाए।
- सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का अधिकार मिले।
- यदि आवश्यकता हो, तो सीमित संख्या में शुल्क के आधार पर प्रवेश की अनुमति दी जाए।
वीडियो वायरल और महापौर की सलाह
याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने मंदिर परिसर में वीआईपी और आम भक्तों के साथ हो रहे भेदभाव का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला, जिसे लाखों लोगों ने देखा। इसके बाद इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने उन्हें कोर्ट जाने की सलाह दी, जिसके बाद याचिका दाखिल की गई।