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उज्जैन लोकसभा सीट: दूसरी बार आमने-सामने फिरोजिया और परमार, जानें क्या कहता है जातीय समीकरण

Ujjain Lok Sabha Seat: उज्जैन लोकसभा सीट: दूसरी बार आमने-सामने फिरोजिया और परमार, जानें क्या कहता है जातीय समीकरण

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Preetam Manjhi
उज्जैन लोकसभा सीट: दूसरी बार आमने-सामने फिरोजिया और परमार, जानें क्या कहता है जातीय समीकरण

हाइलाइट्स

  • दूसरी बार आमने-सामने फिरोजिया और परमार
  • क्या है उज्जैन-आलोट सीट का संसदीय इतिहास
  • कौन कब जीता और किसने किसको हराया ?
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Ujjain Lok Sabha Seat: उज्जैन में इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। आपको बता दें कि बीजेपी ने फिर से मौजूदा सांसद अनिल फिरोजिया को टिकट दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने यहां से पूर्व विधायक रहे महेश परमार को प्रत्याशी बनाया है। उज्जैन सीट पर लोकसभा का चुनाव चौथे चरण में 13 मई को होगा। अब देखना ये होगा कि इस चुनाव में कौन किसको कड़ी टक्कर देने वाला है। इससे पहले जान लेते हैं उज्जैन लोकसभा सीट का जातीय समीकरण..!

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दूसरी बार आमने-सामने हैं फिरोजिया और परमार

आपको बता दें कि साल 2018 में उज्जैन जिले की तराना विधानसभा सीट से अनिल फिरोजिया और महेश परमार आमने-सामने चुनाव लड़ चुके हैं।

अनिल फिरोजिया को बीजेपी ने मैदान में उतारा था, जबकि महेश परमार को कांग्रेस ने टिकट दिया था।

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साल 2018 के विधानसभा चुनाव में महेश परमार ने अनिल फिरोजिया को 2 हजार वोटों से हराया था।

इसके बाद बीजेपी ने अनिल फिरोजिया को लोकसभा का टिकट दे दिया। इस हिसाब से अनिल फिरोजिया सांसद बन गए। अब एक बार फिर दोनों ही प्रत्याशियों की लोकसभा चुनाव में आमने-सामने टक्कर है।

Ujjain-Lok-Sabha-Seat

कौन है महेश परमार ?

उज्जैन लोकसभा सीट से कांग्रेस ने महेश परमार को मैदान में उतारा है। बता दें कि 44 साल के महेश परमार तराना से कांग्रेस विधायक हैं। वे लगातार दूसरी बार विधायक बने थे।

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बता दें कि महेश परमार की आय का मुख्य साधन वेयर हॉउस और कृषि है। परमार साल 2000 से जिला पंचायत सदस्य रहे हैं। साल 2013 से 2018 तक जिला पंचायत के अध्यक्ष बने।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी होने के चलते 2018 में तराना विधानसभा सीट से उन्हें टिकट मिला था।

बीजेपी के अनिल फिरोजिया को हराकर महेश परमार पहली विधायक बने। कॉलेज के समय छात्र संघ के उपाध्यक्ष रहे।

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परमार विक्रम विश्वविद्यालय NSUI परिक्षेत्र के अध्यक्ष बने। कांग्रेस सरकार के समय माधव कॉलेज जन भागीदारी के अध्यक्ष रहे हैं। उज्जैन महापौर का चुनाव लड़ा, लेकिन बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

कौन है अनिल फिरोजिया ?

बीजेपी प्रत्याशी अनिल फिरोजिया 2 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और दूसरी बार सांसद का चुनाव लड़ने जा रहे हैं, जबकि एक बार वे तराना विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। इसके बाद दूसरी बार विधायक का चुनाव लड़ने पर वे अपने प्रतिद्वंदी महेश परमार से ही हार गए थे।

इसके बाद पार्टी ने उनकों संसद का टिकट दिया था, जिस पर वे जीत गए थे। अनिल फिरोजिया की उम्र तकरीबन 52 साल है और वे ABVP , बजरंग दल, भाजयुमो बीजेपी के नगर और जिला इकाई से लेकर प्रदेश संगठन तक में कार्य कर चुके हैं।

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जानते हैं उज्जैन लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

उज्जैन लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। इस सीट 14 लाख  98 हजार 473 मतदाता हैं।

यहां की जातिगत समीकरणों की बात करें, तो यहां सामान्य वर्ग के मतदाता 24.6% हैं। वहीं, पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या 18.6% है।

इसके अलावा  SC-ST मतदाताओं की जनसंख्या 46.3% है। यहां अल्पसंख्यक समाज के मतदाताओं की संख्या मात्र 3.9% और अन्य 6.6% है।

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उज्जैन-आलोट सीट का संसदीय इतिहास

उज्जैन लोकसभा क्षेत्र के पूराने आकड़ों पर नजर डाले तो यहां बीजेपी बेहतर स्थिति में रही है। इस सीट पर 1984 के बाद यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला रहा है।

साल 1984 और 2009 को छोड़कर कांग्रेस यहां कभी भी जीत नहीं पाई है। जबकि यहां 1984 से अब तक 8 बार बीजेपी के उम्मीदवार जीत हासिल कर चुके हैं।

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कौन कब जीता और किसको हराया ?

- साल 1952 से 1967 तक यहां पर कांग्रेस के नेता राधेलाल व्यास सांसद रहे, उन्होंने भारतीय जनसंघ के भार्गव कैलाश प्रसाद को हराया था।

- साल 1967 में जनसंघ के हुकुमचंद कछवाय ने कांग्रेस के दुर्गादास सूर्यवंशी को हराया था।

- साल 1971 में जनसंघ के फूलचंद वर्मा ने कांग्रेस के बापूलाल मालवीय को हराया।

- साल 1977 में भारतीय लोकदल के हुकुमचंद्र कछवाय ने कांग्रेस के दुर्गादास सूर्यवंशी को हराया।

- साल 1980 में बीजेपी के सत्यनारायण जटिया ने कांग्रेस के सुज्जनसिंह विश्नार को हराया।

- साल 1984 में कांग्रेस के सत्यनारायण पंवार ने बीजेपी के डॉ. सत्यनारायण जटिया को हराया।

साल 1991 में बीजेपी के डॉ. सत्यनारायण जटिया ने कांग्रेस के सज्जनसिंह वर्मा को हराया।

साल 1996 में बीजेपी के जटिया ने कांग्रेस के सिद्धनाथ परिहार को हराया।

साल 1998 में बीजेपी के जटिया ने कांग्रेस के अवंतिका प्रसाद मरमट को हराया।

साल 1999 में बीजेपी के जटिया ने कांग्रेस के तुलसीराम सिलावट को हराया।

साल 2004 में बीजेपी के जटिया ने कांग्रेस के प्रेमचंद्र गुड्डू केा हराया।

साल 2009 में कांग्रेस के प्रेमचंद्र गुड्डू ने बीजेपी के जटिया को हराया।

साल 2014 में बीजेपी के चिंतामणि मालवीय ने कांग्रेस के प्रेमचंद्र गुड्डू को हराया।

साल 2019 में बीजेपी के अनिल फिरोजिया ने बाबूलाल मालवीय को हराया।

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