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क्या लोक अदालत के लिए चाहिए होता है वकील? जानिए कितनी लगती है फीस?

लोक अदालत आम लोगों को सस्ता, सरल और त्वरित न्याय दिलाने की व्यवस्था है। लोक अदालत में मामला निपटाने के लिए वकील रखना अनिवार्य नहीं होता। पक्षकार स्वयं भी अपना पक्ष रख सकता है।

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Sourabh Pal

क्या आप भी कोर्ट-कचहरी के चक्करों और वकीलों की भारी-भरकम फीस से परेशान हैं? सालों से कोई छोटा सा मामला लटका हुआ है? तो आज का वीडियो आपके लिए 'लाइफ सेवर' साबित हो सकता है। आज हम बात करेंगे 'लोक अदालत' की, जहाँ न तारीख का टेंशन है और न ही जेब खाली होने का डर। लेकिन क्या यहाँ वकील करना ज़रूरी है? और कितना खर्चा आता है? सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वकील रखना ज़रूरी है? तो आपके बता दें कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। लोक अदालत को बनाया ही इसलिए गया है ताकि आम आदमी बिना कानूनी पेचीदगियों के सीधे जज साहब के सामने अपनी बात रख सके। अगर आपका मामला छोटा है, जैसे ट्रैफिक चालान या बिजली का बिल, तो आप खुद जाकर बात निपटा सकते हैं। पर अगर मामला थोड़ा तकनीकी है या बड़ी रकम का बीमा क्लेम है, तो वकील रखना समझदारी है। वो आपके पेपरवर्क और शर्तों को चेक कर लेते हैं ताकि आपके साथ कोई घाटा न हो। लोक अदालत की सबसे अच्छी बात ये है कि यहाँ कोर्ट फीस या तो जीरो होती है या नाममात्र। अगर आपने पहले से कोई कोर्ट फीस जमा की हुई है, तो वो भी वापस मिल जाती है। यानी अदालत का खर्चा लगभग शून्य! और अगर आप वकील की फीस भी नहीं दे सकते, तो सरकार आपको मुफ्त वकील देती है।

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