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आज का मुद्दा: सियासत की रोटी... खाली पेट रसोइएं, एक महीने से रसोइयों का अनशन जारी

छत्तीसगढ़ में मिड-डे मील रसोइया कर्मचारी एक महीने से आमरण अनशन पर हैं। 2000 रुपये वेतन, कलेक्टर दर और बीमा की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। इस बीच दो रसोइयों की मौत के बाद सियासत तेज हो गई है।

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Sourabh Pal

आज का मुद्दा: सियासत की रोटी... खाली पेट रसोइएं, एक महीने से रसोइयों का अनशन जारी छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बच्चों की थाली तो पौष्टिक है. लेकिन उसी थाली को परोसने वालों की ज़िंदगी कुपोषण से जूझ रही है. जो रसोइया रोज़ बच्चों की सेहत का ख़याल रखता है, आज वही अपने परिवार का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहा है. 29 दिसंबर से प्रदेश के रसोइया कर्मचारी आमरण अनशन पर हैं... मांग सिर्फ़ इतनी की कलेक्टर दर पर वेतन और सुरक्षा बीमा मिले... लेकिन सरकार की तरफ़ से मेहनत की कीमत सिर्फ़ 2000 रुपए महीना... इतनी रकम में घर चले या ज़िंदगी. बीते एक महीने से प्रदेशभर में अनशन जारी है, और इसी बीच दो रसोइया कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है...सवाल ये है कि इन मौतों की ज़िम्मेदारी आखिर किसकी है . अब इस मुद्दे पर सियासत तेज़ है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार को घेरा. उन्होंने कहा D.Ed अभ्यर्थी हड़ताल पर हैं, रसोइया संघ हड़ताल पर है. दो लोगों की मौत हो चुकी है. इसका जिम्मेदार कौन है.

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