बालाघाट में सफेद रंग के उल्लू के चार बच्चे मिलने से लोग हैरत से भर गए... वारासिवनी में एक पुराने मकान को तोड़ते समय ये वाक्या सामने आया... लोगों में ये चर्चा तेज हो गई कि भारत में सफेद उल्लू नहीं पाए जाते, तो ये आए कहां से? जिज्ञासा के समाधान के लिए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभय कोचर से बातचीत की गई... उन्होंने बताया कि ये बच्चे बर्न आउल प्रजाति के हैं, जिन्हें आमतौर पर खलिहानी उल्लू कहा जाता है... खलिहानी उल्लू की पहचान उसके दिल के आकार जैसे चेहरे, छोटी आंखों और चोंच से होती है... ये उल्लू बड़ी संख्या में चूहों का शिकार करते हैं और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं... जादू-टोना जैसी कुप्रथाओं और प्राकृतिक आवासों के खत्म होने के कारण सभी उल्लू प्रजातियां खतरे में हैं... ऐसे में इनका संरक्षण बेहद जरूरी है..
Balaghat में सफेद उल्लू के बच्चों ने बढ़ाई जिज्ञासा, एक्सपर्ट ने बताया बार्न आउल का सच
बालाघाट के वारासिवनी में सफेद उल्लू के चार बच्चे मिलने से लोगों में जिज्ञासा फैल गई। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने स्पष्ट किया कि ये बार्न आउल प्रजाति के हैं, जो किसानों के लिए बेहद उपयोगी और संरक्षण योग्य पक्षी हैं।
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