पंडुम..सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है..आदिवासी नेताओं का कहना है कि इसे किसी आयोजन या प्रचार के लिए इस्तेमाल करना उनके गौरव का अपमान है... वहीं राजनीतिक पार्टियां इसे सांस्कृतिक प्रचार और जागरूकता का माध्यम बताती हैं...क्यों पंडुम पर मचा है बवाल..इसी पर करेंगे चर्चा..पहले देखिए ये रिपोर्ट..
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