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SC Free Sanitary Pads Order: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्लास 6वीं से 12वीं तक के स्कूलों में रखें फ्री सेनेटरी पैड

SC Free Sanitary Pad Order: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब से कक्षा 6 से 12वीं तक की लड़कियों को मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके साथ ही उनके लिए सभी स्कूलों में टॉयलेट की सुविधा भी दी जाएगी.

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Satya Sharma
SC

SC Free Sanitary Pad Order: आज सुप्रीम कोर्ट में स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने और उनके लिए अलग से टॉयलेट सुनिश्चित करने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब से कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएंगे.

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बता दें कि पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि स्कूली छात्राओं की मेंस्ट्रुअल हाइजीन सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. इस ड्राफ्ट को रायशुमारी के लिए तमाम स्टेकहोल्डर्स को भेजा गया था. चार हफ्ते में पॉलिसी को अंतिम रूप दे दिया गया. देशभर के सरकारी और आवासीय स्कूलों में कक्षा छठी से 12वीं तक की छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड देने और महिलाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. यह याचिका कार्यकर्ता जया ठाकुर ने दाखिल की है.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र की राष्ट्रीय नीति ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ के अखिल भारतीय कार्यान्वयन पर अपना फैसला 10 दिसंबर 2024 को सुरक्षित रख लिया था. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के माध्यम से राष्ट्रीय नीति के कार्यान्वयन पर एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था.

स्कूली बच्चियों के स्वास्थ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने राज्यों को स्कूलों के अंदर मुफ्त सेनेटरी पैड रखने के निर्देश दिए हैं. इसी के साथ अदालत ने कहा है कि अगर सरकारें लड़कियों को टॉयलेट और मुफ्त सेनेटरी पैड देने में फेल होती हैं, तो उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा.

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सभी स्कूलों में दिए जाएं फ्री सेनेटरी पैड

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर प्राइवेट स्कूल लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय और सेनेटरी पैड देने में विफल होते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी. मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान में दिए गए जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है. इसी के साथ अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी स्कूलों में दिव्यांगों के लिए अनुकूल शौचालय उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। वहीं सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में महिला और पुरुष छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

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