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Budget 2026 TDS Cut: देश का आम बजट 1 फरवरी 2025 को पेश किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने FD के ब्याज पर काटे जाने वाले TDS की लिमिट 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का फैसले की घोषणा की। अब सीनियर सिटीजन्स और पेंशनर्स के हाथ में ज्यादा कैश आएगा और बैंकिंग सिस्टम की मुश्किलों से भी छुटकारा मिलेगा।
पहले क्या था TDS का नियम
अब तक TDS पर नियम ये था कि जैसे ही किसी सीनियर सिटीजन के सभी बैंक खातों से प्राप्त कुल सालाना ब्याज आय 50 हजार से ऊपर हो जाती थी तो उस पर बैंक 10 प्रतिशत की दर से TDS काटना शुरू कर देते थे। अब TDS की लिमिट बढ़ने से ब्याज आय 1 लाख होने से बुजुर्गों को अपनी FD पर ब्याज आय बिना कटौती के मिलेगी।
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उदाहरण से समझिए
आमतौर पर सीनियर सिटीजन्स अपने खर्च के लिए FD के ब्याज पर निर्भर रहते हैं। अगर किसी सीनियर सिटीजन को 90 हजार सालाना ब्याज मिलता था, तो बैंक 50 हजार की छूट सीमा के बाद बाकी 40 हजार रुपये पर 10 प्रतिशत TDS काट लेता था। नजीता ये कि सीनियर सिटीजन्स के हाथ में हर महीने ब्याज का पैसा कम आता था।
मान लीजिए किसी सीनियर सिटीजन को FD पर सालाना ब्याज मिलता है 90,000
सरकार ने 50,000 तक TDS में छूट दी हुई थी।
बची रकम 90,000 - 50,000 = 40,000
इस 40,000 पर बैंक 10% TDS काट लेता था।
सालाना मिलने वाला ब्याज = 90,000
TDS कटौती = 4,000
हाथ में मिला = 86,000 सालाना
86,000 ÷ 12 = 7,167 प्रति महीना
जबकि असल ब्याज 7,500 महीना बनता था, यानी हर महीने करीब 333 रुपये कम मिलते थे।
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कागजी कार्रवाई का झंझट नहीं
सीनियर सिटीजन्स के लिए ITR भरना और रिफंड का इंतजार करना एक मानसिक और शारीरिक बोझ होता है। बहुत से बुजुर्ग ऐसे हैं जिनकी इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती। फिर भी बैंक के TDS काटने के कारण उन्हें अपना पैसा वापस लेने के लिए ITR फाइल करना पड़ता था। TDS की सीमा बढ़ने से बुजुर्गों को फॉर्म 15H जमा करने का बार-बार झंझट नहीं करना पड़ेगा। उन्हें सरकार से अपना ही पैसा वापस लेने के लिए महीनों इंतजार नहीं करना होगा।
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